ताजासमाचार

नीमच जिला अस्पताल के चिकित्सकों की बड़ी उपलब्धि – चिकित्सकों ने किया जटिल प्री-ऑर्थोस्कोपिक साइनस ऑपरेशन, मरीज पूरी तरह स्वस्थ

डेस्क न्यूज 06 October, 2025

नीमच (द वॉचमैन पोस्ट) । जिला अस्पताल, नीमच के ईएनटी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है। विभाग के डॉक्टरों ने एक जटिल प्री-ऑर्थोस्कोपिक साइनस सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। यह शल्यक्रिया डॉ.अपूर्व चौहान के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई, सर्जरी शासकीय चिकत्सा महाविद्यालय, नीमच के चिकित्सकों डॉ.अक्षिता भार्गव, डॉ.अरविंद गुप्ता तथा उनकी टीम के सहयोगी पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा सफलता पूर्वक की गई ।

मरीज को थी सांस लेने और संक्रमण की तकलीफ
जानकारी के अनुसार, साइनस की यह जटिल बीमारी लंबे समय से मरीज को परेशान कर रही थी। मरीज को बार-बार संक्रमण होने और सांस लेने में तकलीफ बनी रहती थी। जिला अस्पताल की ईएनटी टीम ने सूक्ष्म तकनीक के माध्यम से सफल ऑपरेशन कर मरीज को राहत दिलाई।

नीमच जिला चिकित्सालय के लिए बड़ी उपलब्धि
इस ऑपरेशन की सफलता को जिला अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ज्ञात हो की मेडिकल कॉलेज के बाद शने-शने अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब जिले के मरीजों को उच्चस्तरीय सर्जरी के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

डॉ.अक्षिता भार्गव (ईएनटी विशेषज्ञ) ने बताया कि इस जटिल शल्यक्रिया के सफल होने से अब ऐसे मरीजों को भी राहत मिलेगी जो वर्षों से साइनस संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं।

डॉ.आदित्य बेराड़ (अधिष्ठाता, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नीमच) ने इस उपलब्धि पर चिकित्सा दल को हार्दिक बधाई दी है और कहा है कि महाविद्यालय एवं अस्पताल भविष्य में भी इसी प्रकार उच्च गुणवत्ता वाली विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएँ जनता को प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध रहेंगे।

जिला अस्पताल, नीमच के सिविल सर्जन डॉ.महेन्द्र पाटील ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि नीमच जिले के नागरिकों के लिए गर्व की बात है और यह इस बात का प्रतीक है कि जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उच्च गुणवत्ता की ओर अग्रसर हैं। 
प्री-ऑरिक्यूलर साइनस एक जन्मजात विकृति है जिसमें कान के आगे छोटे छिद्र अथवा नाल दिखाई देते हैं। इन छिद्रों के नीचे त्वचा के अंदर संकरी नाल होती है जो कभी-कभी बार-बार संक्रमण और पस से भरी सूजन का कारण बन सकती है। आमतौर पर जन्म के समय यह विकृति उपस्थिति होती है और अधिकतर मामलों में कोई समस्या उत्पन्न नहीं करती परंतु संक्रमण या बार-बार पस निकलने की स्थिति में शल्यक्रिया आवश्यक हो जाती है।
जिला अस्पताल नीमच की चिकित्सा टीम का यह प्रयास जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

Related Post