न्यूज डेस्क
07 August, 2025
सामाजिक
नीमच। राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर-न्यायिक विभाजन के विरोध में बुधवार 6 अगस्त से शुरू हुई हड़ताल गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस आंदोलन में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को अब मध्यप्रदेश पटवारी संघ एवं लिपिक वर्ग और राजस्व विभाग कर्मचारी संगठन का भी समर्थन प्राप्त हो गया है, जिससे विरोध और अधिक व्यापक होता जा रहा है।नीमच जिले में लगभग 15 तहसीलदार व नायब तहसीलदार कार्यों से विरत होकर जिला मुख्यालय पर डटे हुए हैं। वे प्रतिदिन शाम 6 बजे उपस्थिति दर्ज कराते हैं, लेकिन राजस्व संबंधी किसी भी कार्य का निष्पादन नहीं कर रहे हैं। गुरुवार को भी अधिकारी अपने निर्धारित स्थान पर उपस्थित रहे और सरकार के निर्णय के विरोध में शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।तहसीलदार संघ के नवीन गर्ग (तहसीलदार, जावद) ने बताया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार न्यायिक और गैर-न्यायिक विभाजन की योजना को पूरी तरह से वापस नहीं ले लेती। उन्होंने कहा कि यह विभाजन संरचनात्मक, विधिक और व्यावहारिक रूप से समस्यापूर्ण है। शासन ने पूर्व में आश्वासन दिया था कि यह योजना केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जाएगी, किंतु अब इसे अन्य 9 जिलों में भी लागू कर दिया गया है, जिससे पूरे संवर्ग में भारी असंतोष है।गर्ग ने बताया कि गैर-न्यायिक अधिकारियों को न तो आवश्यक स्टाफ दिया गया है, न ही तकनीकी संसाधन, जिससे कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। साथ ही, कार्यपालिक दंडाधिकारी की शक्तियों के आधार पर किए गए इस विभाजन से राजस्व अधिकारियों को उनके मूल कर्तव्यों से भटकना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासनिक कारणों से यह विभाजन आवश्यक है, तो कार्यपालिक शक्तियों को सामान्य प्रशासन या पुलिस विभाग को सौंपा जाए।इस बीच मध्यप्रदेश पटवारी संघ के सदस्य घनश्याम पांडे ने कहा कि तहसीलदारों की मांग पूरी तरह से न्यायोचित है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि राजस्व अधिकारियों की मांगों को तत्काल माना जाए, जिससे शासन-प्रशासन के कार्य प्रभावित न हों और आमजन को राहत मिल सके। लिपिक वर्ग ने भी तहसीलदारों को नैतिक समर्थन देते हुए सरकार से इस योजना को रद्द करने की मांग की है।संवर्ग ने शासन से अपील की है कि विभाजनकारी योजना को तत्काल निरस्त किया जाए और राजस्व अधिकारियों की गरिमा, कार्यक्षमता एवं मनोबल की रक्षा की जाए, ताकि प्रदेश में राजस्व व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।