यशवंत राठौर
07 July, 2025
सामाजिक
चित्तौड़गढ़। स्व. भगवती लाल ढीलीवाल की स्मृति में प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर ढीलीवाल परिवार द्वारा थैलेसिमिया पर एच एल ए टाइपिंग टेस्ट एवं थैलेसीमिया के स्थाई समाधान हेतु बोन मेरो ट्रांसप्लांट हेतु निःशुल्क परामर्श एवं जांच शिविर का आयोजन शिविर थैलेसीमिया एवं सिकल सेल वेलफेयर सोसायटी नीमच एवं आचार्य तुलसी बहुउद्देश्यीय फाउंडेशन ;एटीबीएफद्ध चित्तौड़गढ़ के तत्वाधान में 6 जुलाई 2025ए रविवार को केसरिया जैन गुरुकुलए स्टेशन रोड चित्तौड़गढ़ में प्रातः 8 बजे से 1 बजे तक आयोजित किया गया जिसमें कुल 55 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों ने अपने परिजनों सहित पहुंच कर पंजियन कराकर शिविर में निःशुल्क एच एल ए जांच करवाया जिसका प्रति मरीज का खर्च 25000 के लगभग आयोजकों द्वारा वहन किया गया। शिविर में पीड़ित बच्चों एवं उनके परिजनों का मिलाकर कुल 102 एच एल ए जांच कर शेम्पल संगृहीत किया गया। शिविर में चित्तौड़गढ़ जिले के दुरस्त इलाकों सहित प्रतापगढ़ए इंदौरए जोधपुर तक के लोगों ने पहुंच कर निःशुल्क परामर्श का लाभ उठाया।
एटीबीएफ के देव शर्मा ने बताया की थैलेसीमिया मेज़र बच्चों को निःशुल्क चिकित्सा परामर्शए देश के सुप्रसिद्व हेमेटोलॉजिस्ट एवं बोन मेरो ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्टए डॉ सुनिल् भट्ट नारायणा हॉस्पिटल बंगलोर द्ध द्वारा निरूशुल्क परामर्श एवम मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
थैलेसीमिया एवं सिकलसेल वेलफेयर सोसायटी नीमच के सत्येंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चो काए उनके सगे भाई बहनो ; कोई भी उम्र के हो निशुल्क एच एल ए टाइपिंग जांच की गई व थैलेसिमिया मेजर बच्चे ओपीडी के लिए पुरानी सभी रिपोर्ट्स और फेरिटीन की नई रिपोर्ट जांच कर परामर्श प्रदान किया गया। राठौड़ ने बताया कि उन्होंने पूरे देश में अब तक 15 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का निःशुल्क बोन मेरो ट्रांसप्लांट करवाया है।
संस्थापक सुनील ढीलीवाल के अनुसार चित्तौड़गढ़ जिले में इस प्रकार का यह पहला कैम्प आयोजित किया गया है जिसका मरीजों ओर परिवार को सीधा निःशुल्क लाभ मिला।
थैलेसीमिया के इस शिविर में अतिथि पीएमओ डाॅक्टर दिनेश वैष्णवए राम गुरबानी डायरेक्टर भाटिया एंड कंपनीए जैन गुरुकुल अध्यक्ष राजेश विरानीए बलवंत शिशोदिया मौजूद रहें।
पीएमओ डाॅक्टर दिनेश वैष्णव ने कहा कि थैलेसीमिया पर इस प्रकार का यह कैम्प चित्तौड़गढ़ जिले में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। डाॅक्टर दिनेश वैष्णव ने सुनील ढीलीवाल के रक्तदान एवं थैलेसीमिया के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने पर उनका धन्यवाद दिया।
बैंगलोर से पहुंचे डाॅक्टर सुनील भट्ट ने सभी मरीजों का बोन मैरो मैच करने के बाद परिजनों को आवश्यक परामर्श प्रदान कर दवाएं लिखीं। अपने सम्बोधन में डाॅक्टर भट्ट ने सभी परिजनों को कहा कि सभी को विवाह से पूर्व थैलेसीमिया की जांच करवानी चाहिए। अगर पति और पत्नी थैलेसीमिया माइनर से ग्रसित है तो उत्पन्न संतान में 25ः स्वस्थ्यए 25ः मेजर और 50ः थैलेसीमिया माइनर से पीड़ित होंगे। पीड़ित बच्चों के लिए डाॅक्टर ने कहा कि उनका हीमोग्लोबिन 9ण्5 से 10ण्5 के बीच में मेंटेन होना आवश्यक है अधिक होने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उनके पित्त की थैली और लीवर में सुजन आ जाती है और पीड़ित बच्चों का मुंह टेढ़ा हो जाता है शारीरिक क्षमता भी कमजोर हो जाती है। उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों को लाल रक्त कणिकाएं ही डोनेट करनी चाहिए जो कि बच्चे के प्रति किलो वजन के अनुपात में 15 मिलीग्राम प्रति किलो डोनेट करना होता है। भट्ट ने कहा कि ब्लड डोनेशन के बाद बच्चों में आयरन की बैलेंस बिगड़ जाता है जिसे हर 3 माह में जांच करके परामर्श से दवाई लेनी चाहिए।