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नीमच के एक शासकीय विद्यालय में मात्र एक छात्रा: संचालन पर सरकार खर्च कर रही 25 लाख रुपये

कपिलसिंह चौहान 28 June, 2025 अन्य

मप्र में सफेद हाथी साबित हो रहे छात्रों की कमी से जूझते कई शासकीय विद्यालय 

नीमच।(कपिल सिंह चौहान) इस खबर को आप सकारात्मक व नकारात्मक दोनो ही नजरिए से देख सकते हैं।  चाहें तो शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता मान सकते हैं और आप चाहे तो सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इसे व्यर्थ का खर्च बता सकते हैं। आप चाहें जो माने लेकिन यह सच है कि मध्य प्रदेश के नीमच जिले के एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय में मात्र एक छात्रा अध्ययनरत है और आप सुन कर चौंक जाएंगे कि उस छात्रा को पढ़ाने के लिए शासन सालाना लगभग 25 लाख रुपये खर्च कर रहा है। यह माना जाना चाहिए कि छात्रा ने इस विद्यालय का मान रखा क्योंकि यह बच्ची भी यदि यहाँ शिक्षा ग्रहण नहीं करती तो 25 लाख खर्च करने के बाद भी यह विद्यालय छात्र विहीन विद्यालय कहलाता ।   

सरकार शिक्षा का अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान सहित विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने का दम तो भर रही है। गांव-ढाणियों में जगह-जगह उच्च प्राथमिक स्तर के सरकारी विद्यालय भी खोल दिए गए, लेकिन विभागीय अनदेखी व पुरजोर प्रयास के अभाव में शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने की कवायद वैसी दिखाई नहीं दे रही है। इसकी बानगी नीमच जिले के ग्राम गुलाबखेड़ी स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिल रही है। इस शासकीय प्राथमिक विद्यालय में पहली से पाँचवी कक्षा तक मात्र 1 छात्रा का नामांकन है। जबकि विद्यालय में 2 सहायक प्राध्यापक व 1 शिक्षा कर्मी पदस्थ है।

आश्चर्य की बात तो यह है कि इस विद्यालय में भर्ती मात्र एक छात्रा की शिक्षा पर सरकार के लगभग 24-25 लाख रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं । इस विद्यालय में नियुक्त 3 अध्यापकों का मासिक वेतन करीब 2 लाख 50 हजार रुपए है। इसके अलावा स्टेशनरी, पोषणआहार, बिजली व पानी सहित अन्य मदों में होने वाला खर्च अलग है। बीते दिनों यहां से एक शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर अन्य विद्यालय में पदस्थ कर दिया गया।   

पिछले सत्र में इस विधालय में 3 विद्यालय का नामांकन था। पिछले साल 3 शिक्षक 3 बच्चों को पढ़ाते थे।  लेकिन इस बार विद्यालय में मात्र एक छात्रा तेजस्विनी पिता मांगू सिंह रह गई,जो कक्षा तीसरी में अध्ययनरत है और उसे पढ़ाने के लिए अब दो शिक्षक नियुक्त हैं । सरकार द्वारा स्कूल के शिक्षको को दिए जाने वाले वेतन भत्ते, स्कूल मेंटेनेंस, ड्रेस,भोजन आदि का खर्च मोटा-मोटा जोड़ा जाए तो सालाना खर्च करीब 24-25 लाख रुपये अनुमानित बैठता है।

जिले में 10 से कम छात्र संख्या वाले कई विद्यालय

मात्र गुलाबखेड़ी ही नहीं बल्कि जिले में 25 से 30 विद्यालय ऐसे हैं,जहां विद्यार्थियों की संख्या 10 से कम हैं। जिले में 537 प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक वर्तमान में लगभग 48,757 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं । जिन्हें करीब 1029 शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

पूर्व सरपंच भोन सिंह चौहान- “इसके लिए प्रशासन को चाहिए कि स्कूल में संसाधनों की कमी को पूरा किया जाए, बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और गांव में लोगों को अपने बच्चों को स्कूल में भर्ती करने के लिए प्रेरित किया जाए”। उनका कहना है कि “स्कूल बंद करना समाधान नहीं है लेकिन बेहतर व्यवस्थाओं और शिक्षा के स्तर में सुधार जरूरी है”।

स्कूल के शिक्षक धर्मेंद्र सिंह की भी कम छात्र संख्या को लेकर अपनी दलील है। उनका कहना है कि “ज्यादातर बच्चे प्रायवेट स्कूल में जाते हैं, साथ ही अभिभावक बच्चों को सरकारी सांदीपनी (सीएम राइज) विद्यालय में प्रवेश दिला रहे हैं । इससे काफी प्रयास के बाद भी विद्यालय में नामांकन में उत्साहवर्धक बढ़ोतरी नहीं हो पाई। गत वर्ष से शासन की यह नीति हो गई कि 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शाला में प्रवेश न दिया जाए। जबकि प्रायवेट में 3 साल में ही प्रवेश मिल जाता है। अभिभावक अपने बच्चों को लिए 3 वर्ष की उम्र से ही स्कूल में भर्ती करवा देते हैं और चूंकि 6 वर्ष की उम्र तक शासकीय विद्यालय में दाखिला ही नहीं मिलता इसलिए बच्चे निजी स्कूल के ही होकर रह जाते हैं”।    

जिला शिक्षा अधिकारी एस.एम. मांगरिया का कहना है कि, “जिले में इस तरह के कई स्कूल हैं। 10 से कम छात्र संख्या वाले करीब 3 से 4 दर्जन स्कूल हैं । वर्तमान में एडमिशन प्रक्रिया जारी है। इस तरह के विद्यालयों को बंद करने या मर्ज करने के कोई निर्देश वरिष्ठ कार्यालय से नहीं दिए गए हैं। अभी निर्देश यह हैं कि अधिक से अधिक नामांकन करवाना है”। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि “शिक्षा विभाग में अलग-अलग कैडर बने हुए हैं, प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक संवर्ग के शिक्षक को 38 से 40 हजार रुपये, तो सहायक शिक्षक का वेतन एक लाख रुपये से ऊपर है”।

सफेद हाथी साबित हो रहे छात्रों की कमी से जूझते विद्यालय 

एक तरफ प्रदेश सरकार पर करीब 5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ है जो कर्मचारियों की तनख्वाह, विकास कार्यों, लोककल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के कारण दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। वहीं जिम्मेदारो की अनदेखी के चलते, ऐसे सरकारी स्कूल सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। जो सरकार का खर्च बढ़ा रहे हैं। जबकि जिले के जिम्मेदारों को एड़ी चोटी का जोर लगाकर जतन करना चाहिए कि सरकार द्वारा बच्चों की शिक्षा पर खर्च की जाने वाली पाई-पाई का सदुपयोग हो सके और ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी लाभान्वित हो सके।       

जिम्मेदार कहते हैं कि नामांकन बढ़ाने के लिए अभिभावकों से लगातार घर पर संपर्क करते हैं। हैरानी की बात यह भी है कि गुलाबखेड़ी से महज 1 किलोमीटर दूर स्थित गांव मुंडला के सरकारी स्कूल में कक्षा एक से 8 तक करीब 110 बच्चे हैं। यहाँ के प्राथमिक विद्यालय के बच्चे किसी इंग्लिश स्कूल की तरह अंग्रेजी में किताब पढ़ते है और पढ़ने में अव्वल है। मुंडला स्कूल इस ब्लाक का शिक्षा के क्षेत्र में टॉप स्कूल माना जाता है। इस स्कूल में गुलाब खेड़ी गांव के बच्चे भी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जा रहे हैं। कहीं ना कहीं इससे गुलाबखेड़ी के स्कूल के शिक्षकों की कार्य प्रणाली, पढ़ाई के तरीके ओर मैनेजमेंट पर सवाल खड़े होते हैं। यदि बच्चों को अच्छी पढ़ाई गांव में ही मिलती तो वे दूसरे गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने नहीं जाते।

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