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उम्मीदों को उड़ान देता "पंख" अभियान: नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की सार्थक पहल

पंकज मलिक 19 June, 2025

नीमच। बांछड़ा समुदाय को हमेशा वेश्यावृत्ति के नजरिए से ही देखा जाता रहा है और यही कारण है की इस समुदाय के लोग अगर मुख्य धारा में आना भी चाहते हैं तो वे हिम्मत और साहस नहीं जुटा पाते जो उनको आम सामाजिक परिवेश से जोड़ सके और उनकी स्थिति और सम्मान में वृद्धि कर सके। लेकिन कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के ‘पंख अभियान’ ने उन्हे समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का बीड़ा उठाया है । 

NRLM प्रोग्राम के अंतर्गत कई कार्यक्रम जारी

बाँछड़ा समुदाय की स्थिति को सुधारने NRLM और बालविकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में नीमच कलेक्टर ने पिछले 9 महीनों में इस समाज की महिलाओं और युवाओं के लिए जो काम किया है उससे उन पर लगे टैग को बदलने में अहम योगदान दिया है और उन्हें अब अलग नजरिए से देखा जाने लगा है। नीमच जिले का बांछड़ा समुदाय जो वेश्यावृत्ति के लिए ही बदनाम है, कुख्यात है। जिस समाज की महिलाओं को इसी पेशे के लिए जाना जाता था वे जिला प्रशासन की योजनाओं और कार्यक्रमों की वजह से आज मुख्यधारा से जुड़ रही हैं।

जिला नोडल अधिकारी एसडीएम ममता खेड़े कर रही है अभियान की मॉनिटरिंग

26 पंचायतों में 49 स्वसहायता समूह और 26 नोडल अधिकारी और  कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशन में उन पर कमान रखती जिला नोडल अधिकारी एसडीएम ममता खेड़े जब अभियान को लेकर जानकारी दे रही थीं तो उनके चेहरे पर अभियान की सफलता को लेकर खुशी झलक रही थी।

जिले के कई विभाग कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशन में संभाल रहे अपना दायित्व

जिला प्रशासन ने  NRLM.( National rural lively mission ) के अंतर्गत महिला एवं बालविकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उद्योग विभाग, मत्स्य विभाग और अन्य विभागों के सहयोग से बांछड़ा समुदाय की महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ ही स्वावलंबी बनाने और रोजगार देने का अभियान चलाया। साथ ही जन अभियान परिषद जो कि मध्य प्रदेश शासन का प्रकल्प है जिसमें ग्रामीणों के साथ मिलकर सामाजिक संरचना में समरूपता लाने के लिए कार्य किया जाता है उसके अंतर्गत भी जिला प्रशासन कार्य कर रहा है। अभियान के तहत इन महिलाओं के बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिए प्रेरित करना भी  उनका मुख्य उद्देश्य रहा। इस मिशन के अंतर्गत जन अभियान परिषद जैसी संस्थाओं का भी पूरा सहयोग मिला।

ग्राम सभा और पंचायत संवाद की भी रही महती भूमिका

प्रशासन ने गांव में पंचायत संवाद और ग्राम सभाओं के माध्यम से इस समाज के युवक और युवतियों को मुख्य धारा में लाने के प्रयास जारी रखें इसी का प्रतिफल रहा कि 49 ग्रुप के 507 परिवार इस अभियान से जुड़े और आज समाज के अन्य वर्गों के समकक्ष खड़े होने का प्रयास कर रहे हैं । समाज की महिलाओं को हुनरमंद बनाने के लिए उन्हें बंधेज हस्तकला का भी प्रशिक्षण दिया गया और इसके माध्यम से वे अपना स्वरोजगार स्थापित कर पाई हैं । बहुत सी महिलाओं को इस अभियान के अंतर्गत शासन द्वारा स्वीकृत लोन भी दिए गए हैं जिनके माध्यम से कोई किराना की दुकान चला रहे हैं तो कोई अपने अन्य कामों में अपना हुनर आजमा रहे हैं। बहुत सी महिलाओं को ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देकर उन्हें भी रोजगार उपलब्ध कराया गया है ।

महिला बाल विकास अधिकारी अंकिता पंड्या के मार्गदर्शन में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान जारी

इस अभियान के अंतर्गत इस समाज की बालिकाओं को लेकर महिला बाल विकास अधिकारी अंकिता पंड्या के मार्गदर्शन में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण संबंधी जानकारी दी गई व कार्यक्रम आयोजित किए गए ताकि वे अपना स्वरोजगार भी स्थापित कर सकें।

विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत शासन दे रहा लाभ

बाँछड़ा समाज की महिलाओं के उत्थान के लिए जिला प्रशासन द्वारा संत रविदास स्वरोजगार योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना और सावित्रीबाई फुले स्वसहायता समूह के माध्यम से हितग्राहियों को लाभ प्रदान किया जा रहा है।

इन योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को सिलाई मशीनों, बकरी पालन, जैविक खेती, आटा मिल, किराना व्यवसाय के लिए लोन, हैंडलूम प्रोडक्ट बेचने के लिए प्रशिक्षण के साथ लोन, मनिहारी की दुकान,पंक्चर शॉप और ब्यूटी पार्लर के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण देकर रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे समाज की मुख्य धारा में सम्मान के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकें। हितग्राहियों में महिलाओं के साथ इस समाज के युवकों को भी जोड़ा जा रहा है ताकि वह मेहनत कर अपना व्यवसाय करें और परिवार की महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करें।

49 स्वसहायता समूह कार्यरत,लक्ष्य 97 स्वसहायता समूहों का

जिला प्रशासन इनके उत्थान के लिए 49 स्वसहायता समूह बनाकर कार्य कर रहा है। अब प्रशासन का लक्ष्य 97 सहायता समूह बनाने का है और अभी तक 49 समूह बनाए जा चुके हैं इन समूहों के अंतर्गत नीमच ब्लॉक के 11 गांव जिसमें 33 समूह और 167 परिवार हैं, वहीं मनासा ब्लाक के 14 गांव जिसमें 16 समूह और 340 परिवारों के लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं। इन हितग्राहियों का चयन नीमच के 3155 जनसंख्या में से और मनासा ब्लाक की 5506 जनसंख्या में से किया गया है। समूह से जुड़े हितग्राहियों को अभी तक करीब 30 लाख रुपए का बैंक लोन स्वीकृत किया जा चुका है जिससे कई लोग 3 हजार से 10 हजार की मासिक आय भी प्राप्त कर रहे हैं इस समूह में पूरे जिले में कुल 507 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

जिले में हमारा यह प्रयास अनवरत जारी रहेगा- हिमांशु चंद्रा कलेक्टर नीमच

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा कहते हैं कि “हमें शुरुआत में काफी मेहनत करनी पड़ी, हम चाहते थे ये कार्यक्रम बगैर  किसी किसी दबाव के स्वप्रेरणा से लागू किया जाए और इसमें हमें सफलता मिली। हमारे जिले की पूरी टीम इसके लिए लगी रही और आज इसी का परिणाम सामने है। मुझे खुशी है कि इन पर लगे टैबू को हटाने में काफी हद तक हम सफल हुए हैं। हमारा यह प्रयास अनवरत जारी रहेगा और जब तक हम इन्हें मुख्यधारा में लाने के अपने संकल्प तक नहीं पहुंच जाते तब तक हम प्रयास करते रहेंगे”।

पंख अभियान ने दी सफलता की उड़ान

कभी वेश्यावृत्ति के लिए जाने जाने वाले ये गांव और इस समाज के लोग अब अपनी एक नई पहचान के साथ समाज की मुख्यधारा में आ रहे हैं । नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा का यह पंख अभियान इस समाज की महिलाओं को सफलता की एक नई उड़ान के लिए मजबूती से तैयार कर रहा है ।

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