डेस्क न्यूज़
16 July, 2026
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भोपाल। मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और सामुदायिक सशक्तिकरण को लेकर एक अहम प्रशासनिक पहल सामने आई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग से सहयोग मांगा है। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह निर्णय मुख्य सचिवों की 5वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (5th NCCS) में प्राप्त निर्देशों और उसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। रिपोर्ट में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को मजबूत करने और आंगनबाड़ी केंद्रों में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के महाविद्यालय और विश्वविद्यालय अपने आसपास के आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेकर उनके विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसके तहत विद्यार्थियों की भागीदारी से शैक्षणिक, सामाजिक और जागरूकता संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता और सामुदायिक जुड़ाव दोनों मजबूत हो सकें।
महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों में Community Engagement (सामुदायिक सहभागिता) को नई दिशा मिलेगी और बच्चों के प्रारंभिक विकास, शिक्षा तथा अभिभावकों की जागरूकता में सकारात्मक बदलाव आएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग का पत्र प्राप्त होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने भी तत्परता दिखाते हुए सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग तथा प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी महाविद्यालयों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि शासन के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, विभागीय पत्र में इसे सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने की पहल बताया गया है। इसलिए इसे प्रशासनिक विफलता के बजाय सरकार की एक समन्वित योजना के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों की भागीदारी से आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक प्रभावी बनाना है।