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BIG NEWS :- बेदखली आदेश के 10 महीने बाद भी कब्जा बरकरार ! शासकीय शिक्षक पर मंदिर की भूमि हड़पने का आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल

निरंजन शर्मा 24 June, 2026 अन्य

नीमच \ सिंगोली। तहसील सिंगोली के ग्राम अरनिया में भगवान देवनारायण मंदिर से जुड़ी बेशकीमती शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तहसीलदार न्यायालय स्पष्ट रूप से बेदखली का आदेश जारी कर चुका है, तब भी कई महीने बीत जाने के बाद कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले को लेकर मंदिर के पुजारी ने एक बार फिर प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक देते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार ग्राम अरनिया निवासी भगवान देवनारायण मंदिर के पुजारी प्यारचंद पिता नंदाजी दरोगा ने तहसीलदार सिंगोली को आवेदन सौंपकर बताया कि मंदिर से संबंधित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 455 रकबा 0.209 हेक्टेयर तथा सर्वे क्रमांक 456 रकबा 0.293 हेक्टेयर पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया हुआ है। इस संबंध में न्यायालय तहसीलदार सिंगोली में प्रकरण क्रमांक 0066/अ-68/24-25 के तहत सुनवाई हुई थी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजी परीक्षण के बाद मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 (संशोधित 2018) की धारा 248 के अंतर्गत 28 अगस्त 2024 को आरोपी सोहनलाल धाकड़ एवं शंभुलाल धाकड़ के खिलाफ बेदखली आदेश जारी किया गया था। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 24 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाया जाए, अन्यथा पुलिस बल की सहायता से कब्जा हटाकर भूमि संबंधित पक्ष को सुपुर्द की जाए।

आरोप है कि आदेश जारी होने के लगभग दस महीने बाद भी न तो भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और न ही कब्जा मंदिर पक्ष को सौंपा गया। इससे न्यायालयीन आदेश की प्रभावशीलता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

पुजारी प्यारचंद ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि मुख्य कब्जाधारी सोहनलाल धाकड़ पेशे से शासकीय शिक्षक हैं और प्रभावशाली होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि उक्त भूमि मंदिर की व्यवस्थाओं और उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार है। जब भी वे भूमि को मुक्त कराने की मांग करते हैं, तब उन्हें विवाद करने, झूठे मामलों में फंसाने और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।

मामले में यह भी उल्लेखनीय है कि न्यायालय द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि राजस्व निरीक्षक, पटवारी तथा थाना प्रभारी सिंगोली को भी भेजी गई थी। आदेश में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने, भूमि का कब्जा दिलाने तथा पंचनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक आम व्यक्ति न्यायालय के आदेश की अवहेलना करता तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन इस मामले में महीनों गुजर जाने के बाद भी प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बता रहे हैं।

पीड़ित पक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुलिस बल के साथ बेदखली आदेश का पालन नहीं कराया गया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहीं स्थानीय लोगों ने भी जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर मंदिर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

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