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"हर घड़ी को अंतिम घड़ी समझकर करो पुण्य कर्म"— मातेश्वरी मम्मा जगदम्बा सरस्वती की पुण्य स्मृति में उमड़ा श्रद्धा और आध्यात्म का सैलाब

डेस्क न्यूज़ 24 June, 2026 अन्य

नीमच। अन्तर्राष्ट्रीय शांतिदूत ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के 61वें पुण्य स्मृति दिवस पर ज्ञान मार्ग स्थित विशाल सद्भावना सभागार में भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। ब्रह्ममुहूर्त से प्रारंभ हुए इस आध्यात्मिक समागम में बड़ी संख्या में ब्रह्मावत्सों ने सहभागिता कर मातेश्वरी मम्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के जीवन और उनके आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मातेश्वरी मम्मा ने परमात्मा की प्रत्येक आज्ञा को जीवन में आत्मसात कर अपने व्यक्तित्व को दिव्य गुणों से परिपूर्ण बनाया। उनका जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और आध्यात्मिक अनुशासन का अद्भुत उदाहरण था।

सविता दीदी ने कहा कि मातेश्वरी मम्मा हमेशा यह शिक्षा देती थीं कि “हर घड़ी को अपनी अंतिम घड़ी समझकर कर्म करो, तब जीवन में कभी गलत कर्म नहीं होंगे।” यही शिक्षा मनुष्य को सदैव श्रेष्ठ कर्मों की ओर प्रेरित करती है। उन्होंने अपने श्रेष्ठ चरित्र, मधुर व्यवहार और दिव्य जीवनशैली से लाखों लोगों को प्रेरणा दी तथा अनेक लोगों की समस्याओं का आध्यात्मिक समाधान भी प्रदान किया।

लगभग दो घंटे तक चले इस आध्यात्मिक समागम में सामूहिक राजयोग ध्यान, सत्संग एवं ईश्वरीय महाभोग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को आत्मस्मृति का तिलक लगाकर महाभोग प्रसादी वितरित की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और भक्ति से सराबोर रहा।

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