डेस्क न्यूज़
23 June, 2026
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नीमच। जिले की जीरन तहसील अंतर्गत ग्राम सकरग्राम पंचायत चल्दु के ग्रामीणों ने मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर गांव की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग 20 वर्षों से गांव में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं हुआ है, जिसके कारण आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि गांव का आज तक भौगोलिक सीमांकन नहीं किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-46 के समीप स्थित होने के बावजूद सकरग्राम विकास की मुख्यधारा से दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमांकन नहीं होने के कारण गांव दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखाई देता है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विकास कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि गांव का जल्द सीमांकन कर स्पष्ट प्रशासनिक पहचान सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने गांव में पेयजल संकट को भी गंभीर समस्या बताया। उनका कहना है कि पर्याप्त जलापूर्ति व्यवस्था नहीं होने के कारण महिलाओं को प्रतिदिन कई घंटों तक पानी के लिए भटकना पड़ता है। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक विकट हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में गांव के प्राथमिक विद्यालय की जर्जर स्थिति का भी उल्लेख किया गया। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल भवन की हालत बेहद खराब हो चुकी है और किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी रहती है। भवन की स्थिति को देखते हुए अभिभावकों में डर का माहौल है, जिसके चलते कई परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द नया भवन या मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो सकते हैं।
इसके अलावा ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए उचित मार्ग नहीं होने की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही गांव में धर्मशाला या सामुदायिक भवन नहीं होने से सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की वर्षों पुरानी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए तथा पेयजल, शिक्षा, सड़क, सीमांकन और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य जल्द शुरू किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।