डेस्क न्यूज़
15 June, 2026
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नीमच। आगामी अफीम नीति 2026-27 के निर्माण को लेकर सोमवार को शहर के मंगलम रिसोर्ट में अफीम उत्पादक किसानों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों से सीधे सुझाव प्राप्त किए गए, जिन्हें केंद्र सरकार को भेजा जाएगा ताकि नई नीति में किसानों की समस्याओं और आवश्यकताओं को शामिल किया जा सके।
बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर तथा केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के उपायुक्त निखिल गांधी सहित बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान उपस्थित रहे। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि अफीम एक ऐसी फसल है, जिसकी नीति हर वर्ष किसानों के सुझावों और जमीनी आवश्यकताओं के आधार पर तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि तकनीक और डिजिटलीकरण के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों से मिलने वाले सुझाव नीति निर्माण में पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
सांसद गुप्ता ने बताया कि इस बार किसानों की ओर से लगभग 50 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। इनमें प्राकृतिक आपदाओं, विशेष रूप से ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के मूल्यांकन और मुआवजा प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की मांग प्रमुख रही। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल नुकसान का सही आकलन और समय पर राहत मिलना आवश्यक है।
बैठक में नामांतरण प्रक्रिया को सरल बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने सुझाव दिया कि किसी पट्टाधारी किसान की मृत्यु होने पर अफीम का पट्टा प्राथमिकता के आधार पर उसकी पत्नी अथवा माता के नाम स्थानांतरित किया जाए, ताकि परिवार को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं और परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मॉर्फिन जांच प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में अत्याधुनिक तकनीक और कलर मैचिंग लाइब्रेरी के उपयोग से परीक्षण प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। उन्होंने बताया कि पूर्व में बड़ी संख्या में पट्टे निरस्त हो जाया करते थे, लेकिन तकनीकी सुधारों के कारण इस स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। प्रारंभिक संकेतों के अनुसार इस वर्ष अफीम उत्पादन और मॉर्फिन कंटेंट की रिपोर्ट भी बेहतर रहने की संभावना है।
सांसद ने कहा कि नीमच-मंदसौर क्षेत्र के किसान वैधानिक अफीम उत्पादन के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं। किसानों की ईमानदारी, मेहनत और नियमों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण इस क्षेत्र की विशेष प्रतिष्ठा बनी हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों को उचित मूल्य, सुविधाएं और बेहतर नीतिगत समर्थन मिलता रहा तो वे भविष्य में भी पूरी निष्ठा के साथ वैध अफीम उत्पादन करते रहेंगे।
बैठक में किसानों की विभिन्न समस्याओं, फसल नुकसान, नामांतरण, मॉर्फिन परीक्षण प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित किसानों ने उम्मीद जताई कि उनके सुझावों को आगामी अफीम नीति 2026-27 में शामिल कर जमीनी स्तर की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। बैठक में प्राप्त सभी सुझावों को संकलित कर केंद्र सरकार को भेजने पर सहमति बनी।