डेस्क न्यूज़
12 June, 2026
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नीमच। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मध्याह्न भोजन) योजना एवं आंगनवाड़ी पूरक पोषण आहार योजना का संचालन कर रहे महिला स्वयं सहायता समूहों और रसोईया बहनों ने अपनी विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में योजनाओं के सुचारु संचालन, आर्थिक समस्याओं के समाधान और रसोईया बहनों के हितों से जुड़ी 12 प्रमुख मांगें शामिल की गई हैं।
महिला स्वयं सहायता समूह महासंघ ने ज्ञापन में बताया कि जिले में महिला समूह वर्षों से मध्याह्न भोजन एवं आंगनवाड़ी पोषण आहार योजना का सफल संचालन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कई व्यावहारिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महासंघ ने मांग की कि भोजन एवं पोषण आहार तैयार करने के लिए पर्याप्त गैस कनेक्शन और सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं तथा गैस रिफिलिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
महिलाओं ने कहा कि भोजन पकाने की लागत राशि और खाद्यान्न सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं होने से संचालन में कठिनाई आती है। उन्होंने विद्यार्थियों और हितग्राहियों की वास्तविक उपस्थिति के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी की। साथ ही रसोईया बहनों का मानदेय प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर दिए जाने और वर्तमान मानदेय में वृद्धि की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में बताया गया कि कई स्थानों पर छात्र संख्या कम होने का हवाला देकर वर्षों से कार्यरत रसोईया बहनों को कार्य से पृथक किया जा रहा है, जिससे उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। महासंघ ने ऐसे मामलों में रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
महिलाओं ने कार्य के दौरान दुर्घटना या अप्रिय घटना होने पर तत्काल आर्थिक सहायता तथा कम से कम एक लाख रुपये का निःशुल्क बीमा कवरेज उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। इसके अलावा समूह अनुबंध नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने, भुगतान में दो से तीन माह की देरी समाप्त करने तथा बढ़ती महंगाई को देखते हुए भोजन पकाने की लागत राशि, खाद्यान्न की मात्रा और रसोईया मानदेय बढ़ाने की मांग भी की गई।
महासंघ ने शासन से मांग की है कि महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को विभिन्न स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाए। साथ ही मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके और महिलाओं को सम्मानपूर्वक कार्य करने का अवसर मिले।