डेस्क न्यूज़
04 June, 2026
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नीमच। जिले के आईसीटी (ICT) कंप्यूटर इंस्ट्रक्टरों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग एवं लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा संचालित व्यवस्थाओं में आ रही तकनीकी एवं प्रशासनिक समस्याओं का शीघ्र समाधान कराने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कार्यरत आईसीटी कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर पिछले तीन वर्षों से विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करने, आईसीटी लैब संचालन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण देने तथा विभिन्न शासकीय पोर्टलों पर डेटा संधारण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का दायित्व निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इंस्ट्रक्टरों ने बताया कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एसएसएस-2 आईटी पैनल प्रदर्शित नहीं हो रहा है, जिससे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं मार्च और अप्रैल 2026 का मानदेय अब तक प्राप्त नहीं होने से कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पूर्व सत्रों के अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था किए जाने की भी मांग उठाई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व में मिलने वाली आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) की सुविधा भी पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही है। पुनः ज्वाइनिंग, सेवा अवधि, कार्यभूमिका, अनुभव एवं अन्य सेवा संबंधी विषयों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने से प्रदेशभर के आईसीटी इंस्ट्रक्टर असमंजस की स्थिति में हैं।
मॉडल स्कूल नीमच के आईसीटी इंस्ट्रक्टर लक्ष्मण राठौड़ ने बताया कि वर्तमान में इंस्ट्रक्टरों को वर्ग-2 से वर्ग-3 में कर दिया गया है, जबकि उन्हें पूर्ववत वर्ग-2 में ही रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों की सेवा अवधि का अनुभव अतिथि शिक्षकों की तर्ज पर जोड़ा जाए तथा वर्तमान 14 हजार रुपये मासिक मानदेय में वृद्धि की जाए। बढ़ती महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जिले में लगभग 50 से 60 तथा प्रदेशभर में करीब 4 हजार आईसीटी कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर इन समस्याओं से प्रभावित हैं। उन्होंने शासन से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान, पोर्टल की तकनीकी खामियों का निराकरण और सेवा संबंधी स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। इंस्ट्रक्टरों का कहना है कि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं होने पर उन्हें आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।