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जमीन विवाद में कलेक्ट्रेट और पुलिस विभाग बना 'फुटबॉल का मैदान'

जीरन के जमीन विवाद में दोनों पक्ष दे रहे ज्ञापन पर ज्ञापन, नही हो रहा निराकरण

कपिलसिंह चौहान 27 May, 2025 अन्य

जीरन के जमीन विवाद में दोनों पक्ष दे रहे ज्ञापन पर ज्ञापन, नही हो रहा निराकरण 

नीमच।(कपिल सिंह चौहान) नीमच जिले में भूमि विवाद के एक दिलचस्प मामले ने कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय को 'फुटबॉल का मैदान' बना दिया है। विवाद से जुड़े दोनों पक्ष ‘मस्ती’ से आपस में फुटबॉल खेल रहे हैं। जिम्मेदार मौन बैठे हैं।

सही मालिक को कब्जा दिलाने में विभाग बेबस क्यों ?

तहसीलदार पर एक पक्ष कब्जा ना दिलाने का आरोप लगा रहा है तो दूसरा पक्ष तहसीलदार से जमीन का नामांतरण करवा कर बैठा है। सवाल यह है की जो राजस्व विभाग नामांतरण कर सकता है वह सही मालिक को कब्जा दिलाने में इतना बेबस, लाचार और असमर्थ क्यों है! एक पक्ष द्वारा दिए गए ज्ञापन का निराकरण होता नहीं की दूसरा पक्ष ज्ञापन ले कर चला आता है। अधिकारियों के पास निराकरण का तो समय नहीं लेकिन ज्ञापन दर ज्ञापन लेने का समय है !

दोनों पक्ष खेत में भीड़ रहे और लगा रहे विभागों के चक्कर  

दरअसल मामला जीरन का है। इस मामले में कल सोमवार को शब्बीर हुसैन एंड फेमेली ने एसपी कार्यालय और एसडीएम कार्यालय में शिकायती ज्ञापन दे कर गुहार लगाई थी की उनकी दशकों पुरानी जमीन पर फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर कब्जे की कोशीश की जा रही है। कल शब्बीर हुसैन के परिजनों ने बताया था की इसी आशय की शिकायत उन्होंने 6 माह पहले नवंबर में भी नीमच प्रशासन व एसपी से की थी।

इधर आज मंगलवार को दूसरे पक्ष ने ज्ञापन दे कर बताया की शब्बीर हुसैन परिवार के पास जमीन के मालिकाना हक का कोई सबूत नहीं है। ज्योतिप्रकाश पिता बाबूलाल टांक, ग्राम सियाखेड़ी, प्रतापगढ़ (राजस्थान) ने अपने आवेदन में बताया कि उन्होंने जीरन स्थित खसरा क्रमांक 613 से 618 तक कुल रकबा 439 हेक्टेयर भूमि हरदेव पिता कारूलाल भाटी व सत्यप्रकाश पिता नंदकिशोर पाटीदार से 25 अक्टूबर 2024 को खरीदी थी, जिसका विक्रय पत्र क्रमांक संलग्न है। उन्होंने बताया कि उक्त भूमि का नामांतरण तहसीलदार जीरन द्वारा किया जा चुका है। ज्योतिप्रकाश ने बताया की विपक्षी ताहिर अली व परिवार ने पूर्व में भी उक्त भूमि के नामांतरण में आपत्ति की थी, जिसे विधीसंगत न पाए जाने के कारण तहसीलदार जीरन द्वारा निरस्त कर दिया गया था और ज्योतिप्रकाश का नामांतरण उक्त खसरों पर स्वीकार कर राजस्व में दर्ज किया जा चुका है।

सवाल यह है की दोनों ही पक्ष बीते 6 माह से आवेदन पर आवेदन खेल रहे हैं। एक पक्ष विवादित जमीन पर जाता है तो दूसरा पक्ष अधिकारीयों के पास पहुँच जाता है और दूसरा पक्ष जमीन पर जाता है तो प्रथम पक्ष अधिकारीयों के पास शिकायत ले कर पहुँच जाता है।    

बोहरा परिवार का पक्ष है की रजिस्ट्री फर्जी है और दूसरा यह की सर्वोच्च न्यायालय से उनके पक्ष में फैसला आ चुका है। इस पक्ष का दावा है की मूल मालिक से न्यायालयीन वाद में इनके पक्ष में फैसला आया था। वहीं आज प्रकट हुए ज्योतिप्रकाश ने कहा की सर्वोच्च न्यायालय का कोई फैसला बोहरा परिवार के पक्ष में नही आया और मेरे नाम पर नामांतरण है।

इस दिलचस्प और जटिल मामले का निराकरण क्या इतना कठिन है !   

नीमच जिले में भूमि विवाद का यह मामला वास्तव में दिलचस्प और जटिल है। दोनों पक्षों के दावों और आरोपों के बीच, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठना भी लाज़िमी है। एक पक्ष फर्जी रजिस्ट्री का आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष तहसीलदार द्वारा किए गए नामांतरण का हवाला दे रहा है। स्वाभाविक है की कोई एक पक्ष अनजान है या झूँठ बोल रहा है। मगर सवाल फिर वही की आखिर क्यों अधिकारी इस फुटबॉल गेम का हिस्सा बन रहे हैं ! माना की दोनों पक्षों में से कौन झूँठ बोल रहा है इसका फैसला करना बच्चों का खेल नहीं मगर निराकरण में 6-6 माह लग जाए यह भी तो उचित नहीं माननीय।

यह भी पढ़ें- जीरन में फर्जी रजिस्ट्री के सहारे बोहरा परिवार की जमीन हथियाने का आरोप

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