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नीमच–सिंगोली–कोटा जल्द दौड़ेगी रेल ! 50 साल का इंतजार खत्म—कोटा-नीमच रेल लाइन के फाइनल सर्वे को मंजूरी, विकास को मिला नया ट्रैक

डेस्क न्यूज़ 03 May, 2026 अन्य

नीमच/कोट | राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए दशकों पुराना सपना अब हकीकत में बदलने की ओर है। रेल मंत्रालय ने कोटा-रावतभाटा-बेंगू-सिंगोली-नीमच नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। 201.30 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के लिए मंत्रालय ने 5.03 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित कर दिया है।
50 साल का इंतजार होगा खत्म
क्षेत्रीय जनता पिछले 5 दशकों से इस रेल कनेक्टिविटी की मांग कर रही थी। हालांकि 2014 में प्रारंभिक सर्वे को हरी झंडी मिली थी और 2018 में इसका खाका तैयार हुआ था, लेकिन अब फाइनल सर्वे की मंजूरी ने इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की दिशा में सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
कुल लंबाई: 201.30 किलोमीटर।
राज्यवार विस्तार: इस लाइन का लगभग 84 किमी हिस्सा मध्य प्रदेश और 56 किमी हिस्सा राजस्थान में होगा।
प्रमुख स्टेशन: जावद रोड, रतनगढ़, सिंगोली, भैंसरोडगढ़, जवाहर सागर और रावतभाटा।

दूरी में कमी: इस लाइन के शुरू होने से कोटा और नीमच के बीच की रेल दूरी करीब 60 किलोमीटर कम हो जाएगी।
10 लाख लोगों को फायदा, उद्योगों को मिलेगी रफ्तार
इस रेल मार्ग के बनने से न केवल 10 लाख से अधिक आबादी को सस्ती और सुरक्षित यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि यह आर्थिक रूप से भी क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा:
माल परिवहन: रावतभाटा परमाणु ऊर्जा केंद्र, कोटा थर्मल पावर प्लांट और क्षेत्र के बड़े सीमेंट प्लांटों को कच्चा माल लाने और तैयार माल ले जाने में आसानी होगी।
कृषि व्यापार: नीमच की प्रसिद्ध कृषि उपज मंडी को सीधा कोटा और आगे के बड़े बाजारों से जुड़ाव मिलेगा।
रोजगार: औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
आगे की प्रक्रिया: सर्वे से निर्माण तक
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, फाइनल लोकेशन सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इसके बाद मुख्यालय से वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
"कोटा-नीमच रेल लाइन का फाइनल सर्वे शुरू होना क्षेत्र के विकास के लिए एक मील का पत्थर है। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी यह रूट अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।"
सौरभ जैन, सीनियर डीसीएम, कोटा रेल मंडल

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