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नीमच में 4 दिवसीय भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव, पार्श्वनाथ भगवान की नगरी में जुटेगा देशभर का श्रद्धालु समाज

डेस्क न्यूज़ 13 April, 2026 अन्य

नीमच। बघाना स्थित शक्ति नगर में आगामी प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर रविवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस अवसर पर मालवा-मेवाड़ ज्योति पूज्य साध्वी श्री गुणरंजना श्रीजी म.सा. ने आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता का आह्वान किया।

साध्वी श्रीजी ने बताया कि श्री भीड़भंजन पार्श्वनाथ भगवान की पावन नगरी नीमच में यह महोत्सव 24 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। चार दिवसीय इस आयोजन में विविध धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला होगी।

उन्होंने बताया कि 24 अप्रैल, शुक्रवार को प्रातः स्नात्र पूजन, ज्वारा रोपण, माणक स्तंभ स्थापना एवं क्षेत्रपाल पूजन सहित कई धार्मिक क्रियाएं संपन्न होंगी। इसके साथ दीप स्थापना, अष्ट मंगल, नवग्रह पूजन एवं चौसठ योगिनी पूजन जैसे विशेष अनुष्ठान भी होंगे। शाम को भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं स्वामी वात्सल्य का आयोजन रहेगा।

25 अप्रैल, शनिवार को परमात्मा के अठारह अभिषेक के साथ दिन की शुरुआत होगी, जिसके बाद भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। दिनभर स्वामी वात्सल्य एवं रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा।

26 अप्रैल, रविवार को मुख्य प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन होगा, जिसमें शुभ मुहूर्त में परमात्मा की प्रतिष्ठा संपन्न की जाएगी। साथ ही लघु शांति स्नात्र महापूजन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी दिनभर चलते रहेंगे।

27 अप्रैल, सोमवार को अंतिम दिन द्वार उद्घाटन, नवकारसी एवं सतरभेदी पूजा जैसे प्रमुख अनुष्ठान सम्पन्न होंगे।

साध्वी श्री गुणरंजना श्रीजी म.सा. ने बताया कि इस महोत्सव में देशभर से साधु-साध्वीगण एवं श्रद्धालु शामिल होंगे। आयोजन परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभु सुरीश्वर जी महाराज, गणिवर्य श्री मयंक प्रभ सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विरक्तप्रभ सागर जी महाराज की पावन निश्रा में सम्पन्न होगा, जिसमें पूजनीय आगम ज्योति प्रवर्तित श्री प्रमोद श्रीजी म.सा. की शिष्या एवं अन्य संत-महात्माओं का सानिध्य प्राप्त होगा।

आयोजन को सफल बनाने के लिए ट्रस्ट एवं समाजजन व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं। प्रेस वार्ता के अंत में सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से इस पावन अवसर पर अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया गया।

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