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प्रतापगढ़ में ‘वर्दी’ कटघरे में: 50 लाख की वसूली के लिए किसान को फंसाया, प्रताड़ना से बुजुर्ग की मौत

डेस्क न्यूज़ 05 April, 2026 अन्य

प्रतापगढ़। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छोटीसादड़ी थाने के पुलिसकर्मियों पर सत्ता के दुरुपयोग, फर्जी कार्रवाई और प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामला इतना बड़ा है कि अब अदालत के आदेश पर पुलिस के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करनी पड़ी है।
पहला मामला एक किसान को फर्जी तरीके से फंसाने का है। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने 50 लाख रुपये की वसूली के लिए किसान के घर के बाहर खुद ही डोडा चूरा रख दिया और उसे एनडीपीएस एक्ट के तहत फंसाने की धमकी दी। पैसे नहीं देने पर किसान के खिलाफ तस्करी का केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया।

दूसरा मामला इससे भी ज्यादा संवेदनशील है। गोमाना गांव में एक शादी समारोह के दौरान पुलिसकर्मी बिना अनुमति घर में घुस गए। आरोप है कि उन्होंने एक दिव्यांग बुजुर्ग के साथ मारपीट और बदसलूकी की। सामाजिक अपमान और प्रताड़ना का सदमा बुजुर्ग सहन नहीं कर सके और उनकी मौत हो गई।

इन दोनों मामलों में तत्कालीन एएसआई, हेड कांस्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीद गवाहों के बयान पुलिस के दावों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
खास बात यह है कि एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले ही कार्रवाई पर रोक (स्टे) लगा रखी थी, इसके बावजूद पुलिस ने घर पर दबिश दी। इसे सीधे तौर पर अदालत के आदेश की अवहेलना माना जा रहा है।
पीड़ितों को न्याय के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ा। कुशा बाई के मामले में जब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की, तो विशेष एनडीपीएस न्यायालय के आदेश के बाद मामला दर्ज हुआ। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपित पुलिसकर्मी लंबे समय से एक ही थाने में जमे हुए हैं और राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई से बचते रहे हैं। हाल ही में रिश्वत मांगने के एक मामले में भी एक पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर किया गया था।
अब सवाल यही है— क्या वर्दी का दुरुपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी… या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा?

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