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भोपाल मिसरोद विवाद से भड़का नीमच पाटीदार समाज, पुलिस कार्रवाई को बताया एकपक्षीय; मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

न्यूज डेस्क 11 March, 2026 अन्य

नीमच। भोपाल के मिसरोद क्षेत्र में साध्वी रंजना जी और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद के बाद दर्ज प्रकरण को लेकर अब मामला नीमच तक पहुंच गया है। पाटीदार समाज संगठन जिला नीमच और सरदार पटेल युवा संगठन ने पुलिस की कार्रवाई को एकपक्षीय बताते हुए इसके विरोध में मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पाटीदार समाज संगठन जिला नीमच और सरदार पटेल युवा संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि 23 फरवरी 2026 को शाम करीब 4:30 बजे मिसरोद मुख्य मार्ग स्थित शासकीय स्कूल के पास वाहन निकलने को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी। उनका कहना है कि यह मार्ग काफी संकरा है, जहां एक समय में केवल एक चार पहिया वाहन ही निकल सकता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती रहती है।

ज्ञापन में बताया गया कि उस दिन साध्वी रंजना जी का वाहन कथित रूप से गलत दिशा में खड़ा था, जिससे रास्ता अवरुद्ध हो गया। इसी दौरान एक अन्य वाहन चालक से वाहन पीछे लेने को लेकर कहासुनी हो गई और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इस दौरान साध्वी रंजना जी और एक सामाजिक बंधु के बीच बहस बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई और अफरा-तफरी के बीच वाहन के कांच टूटने जैसी घटना भी हो गई।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि विवाद की शुरुआत उनकी ओर से नहीं की गई थी। इसके बावजूद समाज के लोग थाने पहुंचकर माफी मांगने और आपसी समझौते के लिए भी तैयार थे। पुलिस ने भी प्रारंभ में बातचीत से मामला सुलझाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में साध्वी के समर्थकों के दबाव में आकर चार लोगों के खिलाफ नामजद सहित अन्य लोगों पर गंभीर और गैरजमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया गया।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस ने समाज के पक्ष की ओर से न तो एफआईआर दर्ज की और न ही मेडिकल जांच करवाई। साथ ही समाज के लोगों के घर जाकर पुलिस द्वारा उन्हें और उनके परिवारजनों को परेशान करने की शिकायत भी की गई है।

पाटीदार समाज ने ज्ञापन में मांग की है कि उनके समाज के बंधुओं पर दर्ज कथित झूठे प्रकरण समाप्त किए जाएं, उनके पक्ष की एफआईआर दर्ज की जाए तथा पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से कराई जाए। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने तक किसी अन्य व्यक्ति का नाम प्रकरण में नहीं जोड़ा जाए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पाटीदार समाज हमेशा साधु-संतों का सम्मान करता है और उनका अपमान करना कभी भी समाज का उद्देश्य नहीं रहा है।

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