द वाॅचमेन पोस्ट
11 February, 2026
सामाजिक
नीमच। श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन संगीत ने ऐसा रूप लिया कि सभागार भक्ति और भाव में डूब गया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीत शास्त्री अभय मानके ने ‘गीत रामायण’ की हिंदी संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण को आध्यात्मिक ऊंचाई दे दी।
इंदौर से पधारे मानके अब तक देश-विदेश में 4000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं। मॉरीशस, अमेरिका और लंदन से लेकर बनारस, मुंबई, पुणे तक उनकी स्वरयात्रा गूंज चुकी है। नीमच में उनकी प्रस्तुति ने रामायण के प्रसंगों को सुर, शब्द और भाव के अद्भुत संगम में पिरो दिया। सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संगीत साधना का सार भी साझा किया—
“संगीत गाने से अधिक सुनने से आता है।”
उन्होंने शास्त्रीय और सुगम संगीत का अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि शास्त्रीय संगीत कठोर साधना और नियमों पर आधारित है, जबकि सुगम संगीत भावप्रधान और सहज अभिव्यक्ति का माध्यम है।
संगत में अमृता मानके की मधुर स्वर-सहभागिता, तबले पर प्रीत निर्वाण और हारमोनियम पर एजाज अहमद ने प्रस्तुति को और ऊंचाई दी।
कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन से हुआ। प्राचार्य डॉ. प्रतिभा कालानी ने कहा कि संगीत केवल कला नहीं, ऊर्जा और साधना है। सह-संयोजिका डॉ. अमृता सोनी ने आयोजन को स्वर-लय की गहराई समझने का सशक्त मंच बताया।
सुबह 11 से शाम 5:30 बजे तक चले सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साह से भाग लिया। यूट्यूब लाइव के माध्यम से देशभर से दर्शक जुड़े। रतलाम, जावरा, इंदौर और रामपुरा सहित विभिन्न संस्थानों की भागीदारी ने आयोजन को राष्ट्रीय आयाम दे दिया।
नीमच ने उस दिन केवल कार्यक्रम नहीं देखा— संगीत में डूबी एक सांस्कृतिक साधना का साक्षात्कार किया।