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मेहंदी लगी थी और मंडप सजा था ! बाराती बनकर पहुंचा प्रशासन - शहनाई से पहले गूंजा कलेक्टर का आदेश

डेस्क न्यूज 29 January, 2026 अन्य

नीमच। गांव जवासा में शादी नहीं रची जा रही थी, कानून का मज़ाक उड़ाया जा रहा था। दो नाबालिग बहनों को बचपन से खींचकर सीधे मंडप में बैठाने की तैयारी थी— बारातें तय थीं, रस्में लिखी जा चुकी थीं और समाज आंखें मूंदे खड़ा था। लेकिन इस बार कहानी वैसी नहीं चली जैसी अक्सर चलती है।
सूचना मिली— 29 जनवरी को दो शादियां होंगी। एक बारात राजस्थान से, दूसरी जावद से।  दो लड़कियां ? 16 और 17 साल। यानी उम्र नहीं, अपराध तय था।
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के स्पष्ट निर्देश पर प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम संजीव साहू की निगरानी में, परियोजना अधिकारी इरफान अंसारी के नेतृत्व में संयुक्त दल गांव में ऐसे पहुंचा जैसे बाराती नहीं - कानून खुद मंडप में उतर आया हो।
जैसे ही हकीकत सामने आई- सजावट बेमतलब हो गई, रस्में बेमानी हो गईं और दलीलें खामोश हो गई।  बालिकाओं के पिता और ननिहाल पक्ष के पास न उम्र का प्रमाण था, न जवाब।
सिर्फ एक कबूलनामा— “हां, लड़कियां 18 से कम हैं।”
प्रशासन ने साफ शब्दों में समझाया—बाल विवाह परंपरा नहीं, अपराध है। भावना नहीं, सज़ा है। भीड़ को बताया गया कि यह शादी नहीं, लड़कियों के भविष्य पर डाका है। नतीजा? परिवार झुका। विवाह रुका।
लिखित आश्वासन लिया गया कि भविष्य में समयपूर्व शादी की कोशिश हुई तो पूरी जिम्मेदारी खुद की होगी। मौके पर पंचनामा बना और इतिहास बन गया। इस कार्रवाई में पुलिस, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, पंचायत पूरा तंत्र एक साथ खड़ा दिखा। और गांव ने पहली बार देखा कि बाल विवाह रोका भी जा सकता है।

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