डेस्क न्यूज
02 January, 2026
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इंदौर | इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। इस त्रासदी में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1400 से अधिक लोग उल्टी-दस्त और संक्रमण जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री ने लापरवाही को गंभीर मानते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने तथा प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने नगर निगम में खाली पड़े आवश्यक पदों पर तुरंत भर्ती और तैनाती सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि जल आपूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
घटना को लेकर सामने आया है कि भागीरथपुरा क्षेत्र के कई घरों में लंबे समय से नलों से बदबूदार और रंग बदला हुआ पानी आ रहा था। स्थानीय लोगों द्वारा शिकायतें किए जाने के बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बाद में जब हालात बिगड़े तो प्रशासन ने पानी के नमूनों की लैब जांच कराई, जिसमें पेयजल पाइपलाइन में सीवेज के बैक्टीरिया पाए गए। यही दूषित पानी गंभीर बीमारियों और मौतों का कारण बना।
इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पानी की आपूर्ति, चिकित्सा व्यवस्था और सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आगे ऐसी किसी भी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो।