डेस्क न्यूज
26 December, 2025
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नीमच। जिले में मृत पशुओं के शव उठान और निस्तारण को लेकर गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आने के बाद मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अवैध वसूली, नियमों की खुलेआम अनदेखी और कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोपों को लेकर सर्व हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। संगठनों के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि नीमच जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मृत पशुओं और मवेशियों के शव उठाने एवं उनके निस्तारण की कोई ठोस और पारदर्शी व्यवस्था नहीं है। पूर्व में जिन लोगों के पास इस कार्य के शासकीय ठेके थे, वही लोग आज भी बिना किसी वैध अनुमति के मनमाने ढंग से शव उठान का कार्य कर रहे हैं। आरोप है कि ये लोग गरीब पशुपालकों और गोशाला संचालकों से अवैध रूप से रुपए वसूल रहे हैं। पहले से ही पशु की मृत्यु के कारण आर्थिक संकट झेल रहे पशुपालकों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। कई मामलों में रकम नहीं देने पर मृत पशुओं के शव कई-कई दिनों तक नहीं उठाए जाते, जिससे क्षेत्र में गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
संगठनों ने यह भी गंभीर आरोप लगाए कि मृत पशुओं के निस्तारण के नाम पर नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। शवों से अवैध रूप से खाल उतारी जा रही है तथा मांस, हड्डियों और अन्य अंगों को संग्रहित कर उनका अवैध व्यापार किया जा रहा है। जबकि मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (मृत शरीरों, शवों और अन्य आपत्तिजनक पदार्थों के निपटान के स्थानों को विनियमित करने संबंधी) नियम 1998 के तहत केवल निर्धारित शुल्क लेकर पशुओं को दफनाने का ही प्रावधान है, न कि उनके अंगों के व्यापार का।
ज्ञापन में जीरन तहसील के रामनगर क्षेत्र का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए मृत पशुओं की खाल उतारने, हड्डियों और मांस के अवैध परिवहन व विक्रय के मामलों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। संगठनों का आरोप है कि कुछ लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने से बचते रहे हैं। इससे आमजन में आक्रोश और असंतोष बढ़ रहा है तथा सामाजिक समरसता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
सर्व हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध ठेकों को तत्काल निरस्त किया जाए, मृत पशुओं के निस्तारण के लिए नियमों के अनुसार पारदर्शी और स्थायी व्यवस्था लागू की जाए, अवैध वसूली पर पूरी तरह रोक लगाई जाए तथा पशु अंगों के अवैध व्यापार और परिवहन में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठनों का कहना है कि इससे न केवल कानून व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि गरीब पशुपालकों और गोशाला संचालकों को भी राहत मिल सकेगी।