डेस्क न्यूज
16 December, 2025
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नीमच। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा, नीमच (म.प्र.) के तत्वावधान में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने चार श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द करने सहित अन्य मांगों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन कलेक्टर प्रतिनिधि को सौंपा। इस दौरान सीटू, इंटक, एटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, यूटीयूसी, सेवा सहित बैंक, बीमा, बीएसएनएल, राज्य एवं केंद्रीय कर्मचारी संगठन, योजना, संविदा, आउटसोर्स, ठेका एवं अंशकालीन श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
ज्ञापन में ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए बिना ही चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया, जिससे न्यूनतम वेतन, सुरक्षित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, काम के घंटे और यूनियन बनाने जैसे बुनियादी श्रमिक अधिकार कमजोर हो गए हैं। निजीकरण, ठेकाकरण और आउटसोर्सिंग की नीतियों के कारण मजदूरों के साथ-साथ बेरोजगार युवाओं की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है।
संयुक्त मोर्चा ने 26 नवंबर 2025 के देशव्यापी विरोध दिवस और 9 जुलाई 2025 की आम हड़ताल का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों के विरोध के बावजूद सरकार मजदूर और किसान विरोधी नीतियों पर अडिग बनी हुई है। ज्ञापन में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रतिमाह, 10,000 रुपये मासिक पेंशन, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, मनरेगा में 200 दिन का काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी जैसी प्रमुख मांगें रखी गईं।
इसके साथ ही रक्षा, रेलवे, बिजली, बैंक, बीमा, बीएसएनएल सहित सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने, स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने, किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, पूर्ण कर्ज माफी और महंगाई पर नियंत्रण की मांग भी की गई। नीमच के नयागांव स्थित सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया प्लांट को पुनः सरकारी क्षेत्र में चालू कर श्रमिकों का बकाया वेतन दिलाने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया।
ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रपति से संविधान के तहत हस्तक्षेप कर मजदूरों और किसानों के हित में इन सभी मांगों को स्वीकार कराने की अपील की।