पंकज मलिक
20 September, 2025
प्रशासनिक
नीमच एक्सक्लूसिव न्यूज़ | जिले में कल एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब संस्कार स्कूल की एक बस चालक ने जान जोखिम में डालते हुए रपट पर बहते पानी के बीच बच्चों से भरी बस को पार करा दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसे देखने के बाद प्रशासन हरकत में आया और RTO नंदलाल गामड़ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
लेकिन यहाँ से कहानी में एक चौंकाने वाला मोड़ आया।
गलत बस पर कार्रवाई?
वीडियो में जिस बस को रपट पार करते देखा गया, वह बस न तो नंबर प्लेट से पहचान में आ रही है और न ही उसकी तस्वीर किसी जब्त बस से मेल खा रही है। इसके विपरीत, RTO द्वारा जब्त की गई दो बसें — जिनमें एक श्री केसर एकेडमी की और दूसरी संस्कार स्कूल की है — वीडियो में दिख रही बस से बिल्कुल अलग नजर आ रही हैं।
केसर एकेडमी की बस: MP 44 P 0325
संस्कार स्कूल की बस: MP 44 P 0236
वीडियो में बस: नंबर प्लेट गायब, पहचान मुश्किल
प्रेस नोट में सच्चाई गायब?
RTO ने अपनी ओर से प्रेस नोट जारी कर कार्रवाई की जानकारी दी, लेकिन प्रेस नोट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। वहीं, मीडिया समूहों में चर्चा के बाद एक और बस की तस्वीर साझा की गई, जिससे संशय और भी गहरा हो गया।
जब इस मुद्दे पर RTO नंदलाल गामड़ से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकारा कि:
"हमें जो बस स्कूल प्रबंधन और ड्राइवर ने बताई, हमने वही जप्त की है। वीडियो में नंबर स्पष्ट नहीं था, इसलिए हमने उसी पर कार्रवाई की। अगर किसी के पास पुख्ता जानकारी है तो हम और भी कार्रवाई करेंगे।"
यह बयान अपने आप में आरटीओ की लापरवाह कार्यशैली को उजागर करता है — जहां पुख्ता जांच के बिना कार्रवाई कर दी गई और एक गलत बस को जब्त कर वाहवाही लूटने की कोशिश की गई।
DEO को नहीं है कोई जानकारी!
इस पूरे मामले में हैरानी की बात यह है कि RTO द्वारा जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को भी निर्देशित किया गया है। लेकिन जब DEO एस.एम. मांगरिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने साफ-साफ कहा:
"मुझे इस घटना की कोई जानकारी नहीं है — न संकुल प्राचार्य ने और न ही विकासखंड से कोई सूचना आई है। अगर जानकारी मिलती तो मैं जरूर कार्रवाई करता।"
इस बयान से साफ हो जाता है कि प्रशासन के अलग-अलग विभागों में आपसी समन्वय की भारी कमी है।
जाँच का विषय या प्रशासनिक लीपापोती?
इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि हो सकता है वीडियो में जो बस दिख रही है, उसके कागज़ात या फिटनेस में गड़बड़ी हो और स्कूल प्रबंधन ने बचाव के लिए दूसरी बस आरटीओ को सौंप दी हो। यदि ऐसा है तो यह जांच का गंभीर विषय है और इस लापरवाही का सीधा फायदा बस मालिक को न्यायालय में मिल सकता है।
यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या नीमच प्रशासन संवेदनशील मामलों में बिना पूरी पड़ताल के सिर्फ "एक्शन का दिखावा" कर रहा है?
इस पूरे प्रकरण में:
-बच्चों की जान खतरे में डाली गई
-गलत बस पर कार्रवाई की गई
-प्रेस नोट में भ्रामक जानकारी दी गई
-शिक्षा विभाग तक को जानकारी नहीं थी
अब देखना यह है कि इस मामले में उच्च अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं और क्या जिम्मेदारों पर कोई सख्त कदम उठाया जाएगा, या फिर यह मामला भी अन्य प्रशासनिक भूलों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।