डेस्क न्यूज़
15 September, 2025
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नीमच । कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास, जावद की छात्राओं ने तारापुर की प्राचीन और प्रसिद्ध वस्त्र छपाई कला का अवलोकन किया। छात्रावास की वार्डन गीता सेन के नेतृत्व में 85 छात्राओं ने गीता हैंड प्रिंटर्स की यूनिट का विजिट किया। इस अवसर पर गीता सेन ने परंपरागत कला को संरक्षित रखने के लिए बनवारी झरिया का साल-श्रीफल से सम्मान किया। उन्होंने कहा कि झरिया परिवार ने जिस तरह देश की इस अमूल्य धरोहर को जीवित रखा है, वह सराहनीय है। नेशनल अवार्डी पवन झरिया ने छात्राओं को नाँदना प्रिंट कला की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कला एक लंबी और कठिन प्रक्रिया से गुजरती है, जिसमें 18 चरणों के बाद कपड़ा तैयार होता है और करीब 40-45 दिन का समय लगता है। तारापुर क्लस्टर में ठप्पा छपाई की 6-7 विधियां प्रचलित हैं और सभी में प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ गांव के कई परिवारों के लिए रोजगार का साधन भी बन रहा है।झरिया भाइयों ने अब तक सैकड़ों विद्यार्थियों को ब्लॉक प्रिंटिंग की जानकारी दी और उन्हें प्रशिक्षित किया है। बनवारी झरिया ने कहा कि नाँदना प्रिंट को पुनर्जीवित करने का प्रयास लगातार जारी है। यदि शासन-प्रशासन का सहयोग मिले, तो यह पारंपरिक कला फिर से स्थापित हो सकती है।तारापुर की 400 वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी जीवित है। यहां नाँदना प्रिंट, अलीज़रीन प्रिंट, इंडिगो दाबू, कशिश दाबू, पुरु प्रिंट, ईको प्रिंट, दाबू अनार प्रिंट और तारापुर प्रिंट जैसी विधियों से कपड़ों को नया जीवन मिलता है। झरिया परिवार की मेहनत और समर्पण इस लुप्तप्राय कला को बचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।