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बड़ी खबर- जावद से भाजपा नेता व पूर्व मंत्री का नाम उपराष्ट्रपति की दौड़ में सबसे आगे। पढ़ें कपिल सिंह चौहान की विशेष खबर

कपिलसिंह चौहान 30 July, 2025 राजनीति

संभव हुआ तो नीमच जिले को देश का द्वितीय संवेधानिक शीर्ष पद देने का गौरव हासिल होगा

नीमच.(कपिल सिंह चौहान) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर होने के बाद निर्वाचन आयोग जल्द ही चुनाव की तारीखें घोषित करेगा। पूरी संभावना है कि भाजपा इस पद के लिए जनसंघ और भाजपाई विचारधारा के प्रति समर्पित कार्यकर्ता को ही उम्मीदवार बनाए। फिलहाल इस दौड़ में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर और मप्र के ही जावद के डॉ.सत्यनारायण जटिया का नाम शामिल है जो अन्दर खाने मुख्यरूप से शीर्ष स्तर पर विचारणीय बताया जा रहा है. भाजपा की पूरी कोशिश है कि उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार किसी अन्य सहयोगी दल से बनाने की बजाए भाजपा से ही तय कर उसके नाम पर सहयोगी दलों को राज़ी किया जाए।

डॉ. सत्यनारायण जटिया का नाम उनके समकक्षों में सबसे इक्कीस  

जिन पैमानों पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत को भाजपा की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के लिए फिट उम्मीदवार बताया जा रहा है उन सभी पर उनसे बेहतर और इक्कीस नाम है डॉ. सत्यनारायण जटिया का और पूरी संभावना है कि शीर्ष नेतृत्व डॉ.जटिया के नाम पर सहमत हो और इसकी कई वजहें हैं. थावरचंद गहलोत फिलहाल कर्नाटक के राज्यपाल हैं। 77 वर्षीय गहलोत राज्यसभा में सदन के नेता रह चुके हैं, साथ ही केंद्रीय मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। वहीँ उम्र के लिहाज से समकक्ष 79 वर्षीय डॉ. सत्यनारायण जटिया ने बालपन से आरएसएस का दामन थामा और संघ की कक्षाओं से वाजपेयी जी की सरकार में केंद्रीय मंत्री तक का सफ़र तय किया. डॉ.जटिया फिलहाल भाजपा में सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य भी हैं, उसी तरह जिस तरह गहलोत भी इसके सदस्य रहे हैं. साथ ही डॉ. जटिया केन्द्रीय चुनाव समिती के सदस्य भी हैं. थावरचंद गेहलोत की ही तरह डॉ.सत्यनारायण जटिया जातीय समीकरण (दलित) में भी फिट बैठते हैं और मध्य प्रदेश से ही हैं।

दीर्घ अनुभव डॉ.जटिया का

4 फरवरी 1946 में मध्यप्रदेश के नीमच (तत्कालीन मंदसौर) जिले के जावद में जन्मे हर तरह से अनुभवी डॉ.सत्यनारायण जटिया उपराष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार हैं. उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से बीएससी, एमए, एलएलबी और पीएचडी कर डॉक्‍टरेट की डिग्री हासिल की. उच्चशिक्षित डॉ. जटिया के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहने के साथ ही उनका एक लंबा राजनीतिक जीवन और अनुभव रहा है. उन्होंने 1972 में राजनीति में प्रवेश किया और आपातकाल के दौरान मीसा के तहत हिरासत में लिए गए। वे पहली बार 1977 में मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। बाद में वे उज्जैन से 7 बार लोकसभा के लिए चुने गए और एक कार्यकाल (2014-2020 ) राज्यसभा सदस्य भी रहे। अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति के चेयरमैन के साथ ही 1999 से 2004 तक वाजपेयी जी की सरकार में उन्हें केन्द्रीय श्रम तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बनाया गया था. 

श्रीनगर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले साहसिक क्रांतिकारी ह्रदय के साथ ही डॉ. जटिया का व्यक्तित्व संयत, शालीन और बहुभाषी भी है. संस्कृत के ज्ञाता, कुशल वक्ता और विद्वान डॉ. जटिया का व्यक्तित्व राजनेता के अलावा एक कवि के रूप में संवेदनशील और साहित्यिक गहराई लिए हुए है. उनका कविता संग्रह 1995 में ‘अलख’ नाम से प्रकाशित हुआ था।

कई देशों की यात्रा कर चुके डॉ.जटिया के सभी वरिष्ठ नेताओं से और विपक्षियों से भी मधुर संबंध हैं. इन्ही कारणों से 54 वर्षों से राजनीतिक तौर पर सक्रिय डॉ.सत्यनारायण जटिया उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में लिए जा रहे संभावित नामों में सबसे योग्य उम्मीदवार हैं. उनके समकक्ष नामों में किसी अन्य से उनकी विद्वता, वैचारिकता, रचनात्मकता, बोद्धिकता और तर्कशीलता तुलना से परे है. उनके नाम पर शीर्ष नेतृत्व गहराई से विचार करेगा इसकी पूरी संभावना है.

…और यदि यह संभव हुआ तो प्रदेश को दो मुख्यमंत्री और कई मंत्री व केन्द्रीय मंत्री देने वाले नीमच जिले को उपराष्ट्रपति के रूप में देश के द्वितीय शीर्ष पद देने वाले जिले का गौरव भी प्राप्त होगा… एवमस्तु.

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