डेस्क न्यूज़
20 July, 2025
अपराध
ग्वालियर। झांसी रोड थाना में पदस्थ रहते हुए छुट्टी पर गए टीआई मंगल सिंह पपोला चार महीने बाद भी वापस नहीं लौटे हैं। जिसके बाद शनिवार रात को एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने टीआई मंगल सिंह को सस्पेंड कर दिया है।
सस्पेंड टीआई ने 16 साल पहले हवलदार रहते हुए एमपी के नीमच में एनकाउंटर में एक स्मैक तस्कर को मार गिराया था। जिस पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी मिला था। तीन साल बाद ही, जिस तस्कर का एनकाउंटर करना बताया था, वह जिंदा लौट आया था। तभी से मामले की जांच चल रही थी। हाल ही में मामले की जांच सीबीआई के पास आई। अप्रैल 2025 में सीबीआई ने टीआई के खिलाफ वारंट जारी किया । जिस पर वह लीव लेकर गायब हो गए थे। चार महीने बाद भी लौटकर नहीं आने पर अब एसएसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है।
मंगल सिंह पपोला के खिलाफ वारंट जारी
नीमच में 16 साल पहले हुए एक कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने ग्वालियर के झांसी रोड थाने के टीआई मंगल सिंह पपोला के खिलाफ वारंट जारी किया है। सन 2009 में पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने 7 और 8 फरवरी की रात नशे के तस्कर बंशी गुर्जर को एनकाउंटर में मार गिराया है।
इस घटना के बाद पूरे राज्य में नीमच थाने की पुलिस ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। हालांकि, इस मामले में नया मोड़ उस समय आया, जब तीन साल बाद यानी 2012 में बंशी गुर्जर लौट आया। बंशी गुर्जर के लौट आने के बाद स्पष्ट हो गया कि पुलिस ने फेक एनकाउंटर किया था, जिसमें मारा गया व्यक्ति कोई और था।
सीबीआई के वारंट जारी करते ही गायब हुआ टीआई
ग्वालियर के झांसी रोड़ थाने में तैनात टीआई मंगल सिंह पपोला सीबीआई की कार्रवाई के दायरे में आ गए। सीबीआई ने उनके खिलाफ अप्रैल 2025 में एक वारंट जारी किया था, लेकिन जब यह वारंट लेकर सीबीआई कॉन्स्टेबल थाने पहुंचा तो पपोला वहां नहीं मिले। इसके बाद जब टीआई से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका कुछ पता नहीं चला। पपोला अपना मोबाइल फोन बंद करके अंडरग्राउंड हो गए और स्पेशल पे लीव लेकर गायब हो गए।
फर्जी एनकाउंटर के बाद मिला था प्रमोशन
इस घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों पर फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे थे। तथाकथित एनकाउंटर में मंगल सिंह पपोला भी शामिल थे, जो साल 2009 में हेड कॉन्स्टेबल की पोस्ट पर थे। इस एनकाउंटर के बाद पपोला को प्रमोशन भी मिला था। अभी फिलहाल पपोला टीआई के रूप में ग्वालियर के झांसी रोड थाने में थे। इस दौरान पपोला तत्कालीन टीआई पीएस परमार और मुख्तार कुरैशी के साथ थे।
पहले CID को सौंपी गई थी जांच
इस फर्जी एनकाउंटर की जांच शुरुआत में सीआईडी को सौंपी गई थी, लेकिन इस मामले के पुलिस विभाग से जुड़े होने के कारण इसमें काफी लीपापोती के आरोप लगे थे। इसके बाद कोर्ट में दायर एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया।
हाल ही में कोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई ने मामले की जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। नीमच के इस फर्जी एनकाउंटर के मामले में टीआई पपोला के साथ कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।