धर्मेन्द्र शर्मा
26 June, 2025
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नीमच। (धर्मेन्द्र शर्मा) बुधवार 25 जून की शाम हुई मूसलधार बारिश ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। विगत 10 वर्षों की ही बात कर लें तो ये हालात् तब भी थे और आज भी स्थिति नहीं बदली है। जलभराव की इस समस्या का हल न तब ही था और न आज ही है, जबकि नगर की सीवरेज योजना पर लाखों रुपया अब तक बहाया जा चुका है।
वर्षा पूर्व जल निकासी की कोई कोशिश नहीं-
अगर दो माह बारिश के निकाल दिये जाएं तो शेष दस माह में नगरपालिका वर्षा जल की व्यवस्थित निकासी के लिए तैयारी कर ही सकती है। इसके तहत नीमच के 40 वार्डों की कार्ययोजना तैयार कर नाली- नालियों की समुचित सफाई के साथ ही गंदे पानी की निकासी को प्रवाहमान बनाया जाय। बाजारों में व्यावसायिक संस्थानों के चबूतरों को सीमांतर्गत कर नालियों के रख- रखाव और उन्हें पोलीथीन व कचरामुक्त करने की मुहिम लगातार चले। रहवासी क्षेत्रों में भी लोगों ने भूखंड सीमा से परे जाकर नालियों और नालों पर अतिक्रमण किया हुआ है, जो जल निकासी में अवरोध पैदा कर रहा है। नगरपालिका ने इसके प्रति कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
जलकुंभी उन्मूलन और गहरीकरण की आवश्यकता-
नगर के चारों ओर जो नाला है (कभी नदी के स्वरूप में था), वह या तो कचरे से पटा हुआ है या जलकुंभी से आच्छादित है। नगरपालिका ने विगत कई सालों से इस ओर ध्यान ही नहीं दिया है। नाले का गहरीकरण कर जहाँ एक ओर वर्षा जल संचित किया जा सकता है, वहीँ जलकुंभी पनपने के पूर्व ही इसका नष्टीकरण भी अनिवार्य है। नगर के भूजल स्तर को बनाये रखने के लिए नदी स्वरूप ये नाला महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यही नहीं, गहरीकरण और जलकुंभी-कचरा निष्पादन से ये नाला जलभराव के दबाव को भी कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
आपदा ग्रस्त इलाकों की अनदेखी-
नगर का फव्वारा चौक और इससे लगे क्षेत्र, प्रायवेट बस स्टेण्ड, मूलचंद मार्ग, अंबेडकर कालोनी के समीप ये नाला कमोबेश मूसलधार बारिश के बाद गंभीर आपदा को निमंत्रण देता है। शिवघाट की ओर से आने वाला जलप्रवाह अतिक्रमण और नाले की गंदगी के कारण कई मर्तबा जनहानि का भी कारण बना है। अफ़सोसजनक ही है कि नगरपालिका यहाँ भी कोई समुचित कदम नहीं उठा सकी। प्रशासन भी वर्षा के मद्देनज़र बाढ़ आपदा प्रबंधन के तहत सिर्फ सम्पर्क डेस्क नंबर जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ज़मीनी हक़ीक़त से अब तक मुंह फेरे हुए है।
जनसहयोग की भी दरकार-
ये बात सही है कि नगर में मूसलधार बारिश से उपजी जलभराव की बरसों पुरानी समस्या के निदान का पहला दायित्व नगरपालिका और प्रशासन का है, मगर जनसहयोग के बगैर इसका निराकरण संभव नहीं है। आवासीय क्षैत्रों में रहने वाले नागरिक, अपने घर के दूषित जल की निकासी को व्यवस्थित कर नालियों के जरिये नालों तक प्रवाह को निर्बाध बनाने में अपनी जिम्मेदारी समझे और अतिक्रमण कर दबाई गई नालियों की निकाय द्वारा नियमित सफाई का रास्ता सुनिश्चित करें। बाजार क्षेत्र में नालियों की सफाई के लिए यही सहयोग दुकानदारों से भी अपेक्षित हो जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जलभराव की इस समस्या के मूल में अगर नगरपालिका की अनदेखी प्रमुख कारण है तो ये भी कड़वा सच है कि नालियों पर किये गये अतिक्रमण ने भी इस समस्या के निदान में रोड़े का काम किया है। प्रवाहमान जल का ये स्वभाव है कि वो एक-सा बहता है, मगर जब कहीं अवरोध उसके प्रवाह को बाधित करता है तो वो अपना रास्ता बदल जलभराव सहित आपदा के अन्य स्वरुपों को जन्म दे देता है।