डेस्क न्यूज़
06 July, 2026
अन्य
पंकज मलिक - एक्सक्लुसिव न्यूज़
नीमच, 5 जुलाई 2026। अल नीनो के प्रभाव और कम वर्षा की आशंकाओं के बीच नीमच जिले में चालू वर्षाकाल के दौरान अब तक औसतन 201.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 314.8 मिमी वर्षा की तुलना में काफी कम है, लेकिन हाल के दिनों में हुई बारिश ने किसानों की चिंताओं को कुछ हद तक कम करते हुए अच्छी बारिश की उम्मीदों को फिर से मजबूत किया है।
अधीक्षक भू-अभिलेख, नीमच से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 जून 2026 से 5 जुलाई 2026 की प्रातः 8 बजे तक जिले की चारों तहसीलों में वर्षा का विवरण इस प्रकार है—
- नीमच : 224.0 मिमी
- जावद : 202.0 मिमी
- सिंगोली : 226.7 मिमी
- मनासा : 153.0 मिमी
वहीं, गत वर्ष इसी अवधि में नीमच में 293.6 मिमी, जावद में 330.0 मिमी, सिंगोली में 435.8 मिमी तथा मनासा में 200.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी।
इसी प्रकार, 5 जुलाई 2026 को प्रातः 8 बजे तक बीते 24 घंटों में जिले में औसतन 0.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस दौरान केवल नीमच तहसील में 2.0 मिमी वर्षा हुई, जबकि जावद, मनासा एवं सिंगोली तहसीलों में वर्षा दर्ज नहीं की गई।
अल नीनो और पारंपरिक भविष्यवाणियों ने बढ़ाई थी चिंता
इस वर्ष मौसम विशेषज्ञों द्वारा अल नीनो के प्रभाव के कारण मध्य भारत में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई थी। वहीं, जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पूजनीय स्थानीय देवस्थानों पर की गई पारंपरिक वर्षा भविष्यवाणियों में भी खंड वर्षा की आशंका व्यक्त की गई थी। इन भविष्यवाणियों को ग्रामीण समाज में विशेष महत्व दिया जाता है और इन्हीं कारणों से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई दे रही थीं।
हालांकि, पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने इन आशंकाओं को काफी हद तक कम किया है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कम वर्षा होना अभी भी भविष्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
मानसून की धीमी शुरुआत से प्रभावित हुई खरीफ की बुआई
मानसून की शुरुआती धीमी गति और लंबे अंतराल के कारण जून के प्रथम पखवाड़े में होने वाली खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई। जुलाई के पहले सप्ताह तक भी जिले के कई क्षेत्रों में किसान पर्याप्त नमी का इंतजार कर रहे थे। अब हालिया बारिश के बाद खेतों में नमी बनने से बुआई कार्य ने गति पकड़ ली है और किसान तेजी से खेतों की ओर लौटे हैं।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक असर
नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ सहित पूरे मालवांचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। यदि इस वर्ष पर्याप्त वर्षा नहीं होती है या फसलों के उत्पादन पर इसका प्रभाव पड़ता है, तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के व्यापार और व्यवसाय पर भी पड़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी फसल होने पर ही बाजारों में खरीदारी बढ़ती है, जिससे कृषि यंत्र, वाहन, सर्राफा, कपड़ा, निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य व्यवसायों को गति मिलती है। शहरी व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी ग्रामीण आबादी का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। ऐसे में फसल उत्पादन में किसी भी प्रकार का उतार-चढ़ाव स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।
खरीफ ही नहीं, रबी की फसल का भविष्य भी तय करेगी यह बारिश
विशेषज्ञों और किसानों के अनुसार, वर्तमान मानसूनी वर्षा केवल खरीफ फसलों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आगामी रबी सीजन की सफलता भी इसी पर निर्भर करती है। यदि इस वर्ष पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तालाब, बांध, केन और अन्य जल स्रोत नहीं भरते तथा भू-जल स्तर में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती है, तो इसका असर आगामी रबी फसलों पर भी पड़ेगा।
पूरे मालवांचल क्षेत्र, विशेषकर नीमच, मंदसौर और रतलाम जिले, देश और दुनिया में अपनी अफीम खेती के लिए विशेष पहचान रखते हैं। अफीम की फसल यहां के किसानों की प्रमुख नगदी फसल मानी जाती है और यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। लेकिन अफीम की खेती के लिए पर्याप्त सिंचाई और जल उपलब्धता अत्यंत आवश्यक होती है।
यदि इस वर्ष जल स्रोतों में पर्याप्त पानी का संचय नहीं हो पाता है, तो आगामी रबी सीजन में अफीम सहित अन्य सिंचित फसलों का रकबा प्रभावित हो सकता है, जो किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अफीम उत्पादन में कमी का असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तक पड़ सकता है
मालवा क्षेत्र में उत्पादित अफीम न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि इसका राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण योगदान है। अफीम से प्राप्त एल्कलॉइड्स और मॉर्फिन आधारित औषधियों का उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में किया जाता है तथा इनसे निर्मित दवाओं का निर्यात भी किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल संकट के कारण अफीम उत्पादन और उसके रकबे में कमी आती है, तो इसका असर केवल किसानों और स्थानीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे देश के औषधीय उत्पादन और संबंधित निर्यात गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल, नीमच जिले में हुई हालिया बारिश ने किसानों और व्यापार जगत को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन खरीफ की सफलता, रबी की तैयारी, अफीम उत्पादन, जल स्रोतों की स्थिति और पूरे मालवांचल की अर्थव्यवस्था का भविष्य अब भी जुलाई और अगस्त की बारिश पर ही निर्भर है। यही दो महीने तय करेंगे कि इस वर्ष का मानसून राहत लेकर आएगा या चिंता बढ़ाएगा।