डेस्क न्यूज़
27 May, 2026
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नीमच \ सिंगोली | राजस्थान एवं मध्यप्रदेश की सीमा पर नीमच जिले के सिंगोली के समीप स्थित तिलस्वां घाट इन दिनों लगातार दर्दनाक हादसों का गवाह बनता जा रहा है। यह जानलेवा घाट अब राहगीरों के लिए मौत का रास्ता साबित हो रहा है। रविवार को हुए शिव शक्ति बस हादसे में जहां बस गहरी खाई में गिर गई थी और करीब 32 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे, वहीं ठीक तीसरे दिन मंगलवार देर रात उसी खतरनाक मोड़ पर एक और भीषण हादसा हो गया।
पेंट और पुट्टी से भरी पिकअप वाहन क्रमांक RJ 14 GN 6549 अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भयावह था कि पिकअप में सवार तीन मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद कोटा रेफर किया गया। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।
बताया जा रहा है कि पिकअप वाहन राजस्थान के धौलपुर से बांसवाड़ा की ओर जा रहा था। वाहन में पेंट और पुट्टी की बाल्टियां भरी हुई थीं, जिन पर मजदूर बैठे हुए थे। तिलस्वां घाट के खतरनाक मोड़ पर चालक अचानक वाहन से संतुलन खो बैठा और पिकअप सीधे खाई में जा गिरी।
हादसे के दौरान बाल्टियों में भरा पेंट और पुट्टी मजदूरों के पूरे शरीर पर फैल गया, जिससे घटनास्थल का दृश्य बेहद भयावह और दिल दहला देने वाला हो गया। मृतक उत्तरप्रदेश के बरेली, गाजीपुर तथा राजस्थान के जयपुर निवासी बताए जा रहे हैं, जो बांसवाड़ा में आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे।
घायलों में मोहम्मद जाकिर, इदरीश और सोमपाल शामिल हैं। प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को गंभीर हालत में कोटा रेफर किया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही सिंगोली थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा और तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से मृतकों और घायलों को खाई से बाहर निकालकर सिंगोली अस्पताल पहुंचाया गया।
लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन अब तक क्यों नहीं जागा? तिलस्वां घाट पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? न तो पर्याप्त संकेतक लगाए गए और न ही खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा दीवारों और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नजर आती है।
लगाता तिलस्वां घाट पर हो रहे हादसे अब प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं। आखिर इन हादसों की जिम्मेदारी कौन लेगा? आखिर कब सुधरेगी तिलस्वां घाट की तस्वीर, या फिर इसी तरह मासूम और बेगुनाह राहगीरों की जान जाती रहेगी?