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‘जल है तो कल है’ : सांसद बंशीलाल गुर्जर और कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने जल संरक्षण का दिया संदेश | गंगा दशहरा पर नीमच में गूंजी जल संवर्धन की अलख

डेस्क न्यूज 25 May, 2026 अन्य

नीमच। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर नीमच जिले में आयोजित जिला स्तरीय जल चौपाल में जल संरक्षण और संवर्धन का संदेश पूरे उत्साह के साथ गूंजा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है, जिसमें आमजन की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे रही है।

सावन ग्राम में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर रहे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जनसहयोग से चलाया जा रहा तालाब गहरीकरण अभियान अत्यंत सराहनीय है। इससे जल संरक्षण को नई दिशा मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और ‘हर घर नल से जल’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। सांसद श्री गुर्जर ने सावन में स्टॉप डेम निर्माण के लिए राज्यसभा निधि से राशि स्वीकृत करने की घोषणा भी की।

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने बताया कि जिले में जनभागीदारी से किए गए तालाब गहरीकरण कार्यों से जल संरचनाओं की जल भराव क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही किसानों को खेतों के लिए निःशुल्क उपजाऊ मिट्टी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी मिला। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षा ऋतु में प्रत्येक ग्राम पंचायत में व्यापक पौधारोपण किया जाएगा तथा स्टॉप डेम और चेकडेम निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव, जनपद अध्यक्ष शारदा बाई धनगर, पूर्व जनपद सदस्य प्रेमसिंह परिहार, अर्जुन सिंह सिसोदिया सहित जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। ग्रामीणों ने साफा बांधकर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। जन अभियान परिषद द्वारा निकाली गई भव्य जल कलश यात्रा में महिलाओं, ग्रामीणों और अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह यात्रा गांव भ्रमण करते हुए बीसभुजा माता मंदिर पहुंची, जहां जल चौपाल का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम के बाद मुख्य अतिथि एवं कलेक्टर ने बीसभुजा माता मंदिर के समीप स्थित तालाब के गहरीकरण एवं घाट साफ-सफाई कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

गंगा दशहरा पर आयोजित यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामूहिक जागरूकता और जनभागीदारी का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।

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