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खटाई में पड़ सकती है शिवराज की पदयात्रा: हाईकमान से नहीं ली मंजूरी

यात्रा के दौरान

कपिल सिंह/पंकज मलिक 26 May, 2025 राजनीति

सूत्रों से खबर: पदयात्रा को लेकर हाईकमान से नहीं ली मंजूरी, पदयात्रा के निकाले जा रहे कई मायने

भोपाल। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पदयात्रा को लेकर अंदरखाने से कई तरह की खबरें आ रही है। बताया जा रहा है कि हाईकमान के एक धड़े ने पदयात्रा पर संज्ञान ले लिया है, इसके कोई परिणाम तो अब तक नहीं आए है लेकिन माना जा रहा है कि उक्त यात्रा समय से पहले खटाई में पड़ सकती है। यदि ऐसा हुआ तो यात्रा बंद भी हो सकती है।

असल में शिवराज केंद्र की राजनीति में है और पूरे देश के केंद्रीय मंत्री है लेकिन उन्होंने किसी और राज्य को पदयात्रा के लिए नहीं चुना और मध्यप्रदेश में यात्रा की शुरुआत भी कर दी। जबकि वह मध्यप्रदेश में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे, उनकी पकड़ भी मध्यप्रदेश में कम नहीं है। तब भी वह एकदम से यात्रा पर निकल पड़े। सूत्रों के मुताबिक इसके लिए हाईकमान से विचार—विमर्श भी नहीं किया।

उधर मोहन सरकार इस समय अप्रत्यक्ष रूप से मंत्री विजय शाह, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और अपने ही कुछ नेताओं के सेना को लेकर दिए बयानों के बाद जनभावनाओं का सामना कर रही है। कांग्रेस एक तरह से हावी है। इन तमाम ज्वलंत मुद्दों का हल निकालने में मदद करना छोड़ शिवराज पदयात्रा पर हैं, वह भी ऐसे समय में जब न तो चुनाव है और न ही आने वाले समय में कोई चुनाव होने है।

दरअसल जब मप्र की बुधनी और विजयपुर सीट पर उप चुनाव में मप्र भाजपा की साख दांव पर लगी थी,तब भी शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह समय नहीं दिया था। सूत्रों के मताबिक चौहान का अचानक परिवार के साथ पदयात्रा पर निकलना हाईकमान को राजनीतिक प्रतिद्वंदता नजर आ रही है जिसने प्रदेश भाजपा को ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भाजपा को भी एक तरह से संकट में डाल दिया है।

पदयात्रा के लिए दूसरे राज्यों को चुनते तो बढ़ सकता था कद

राजनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री होने के नाते उन राज्यों को चुनते, जहां भाजपा कमजोर है या भाजपा की सरकार नहीं है तो हाईकमान की नजर में उनका कद ओर बढ़ गया होता। लेकिन मध्यप्रदेश वर्षों से भाजपा के पास है, आगे भी भाजपा को पटकनी देने जैसी स्थिति दिखाई नहीं दे रही है। अब डॉ.मोहन यादव मुख्यमंत्री हैं और उन्हें डेढ़ वर्ष ही हुए हैं । ऐसे में हाईकमान उन्हें खुला मैदान देना चाहता है, ताकि पार्टी के पास एक से अधिक नेतृत्व करने वाले लोग हों। वैसे भी शिवराज सिंह चौहान को कम से कम मप्र में किसी पदयात्रा की जरुरत नहीं थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही शिवराज सिंह चौहान को यह यात्रा फायदा दें, लेकिन प्रदेश व राष्ट्रीय भाजपा के लिए यात्रा परिणाम देने वाली नहीं मानी जा रही है, जबकि शिवराज का कद राष्ट्रीय नेता का है, इसलिए उनसे राष्ट्रीय नेतृत्व कमजोर राज्यों में जोश भरने की अपेक्षा कर रहा है। 

यात्रा के दौरान "टाइगर अभी जिंदा है" बोलकर किसे चुनौती दे रहे शिवराज !  

शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपनी इस यात्रा को "विकसित भारत संकल्प पदयात्रा" नाम दिया है । वे विकसित भारत संकल्प पदयात्रा का उद्देश्य “लोगों को मोदी जी के विकसित भारत के बारे में बताना और उन्हें गांव के विकास में भाग लेने के लिए प्रेरित करना बता रहे हैं” मगर इस पदयात्रा के सियासी मायने अलग ही हैं। माना जा रहा है कि यह यात्रा केंद्र में केन्द्रीय मंत्री के रूप में व्यस्त शिवराज सिंह चौहान के लिए मप्र में अपनी पकड़ बनाए रखने और खुद के लिए व अपने परिवार को विकल्प के रूप में जमाए रखने की कवायद है। इस पदयात्रा में उनकी पत्नी, बेटा और बहू भी शामिल हुए। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र में लाडकुई से भदकुई तक 'विकसित भारत संकल्प पदयात्रा' शुरू हुई तो इस दौरान उन्होंने मंच से 'टाइगर अभी जिंदा है' बोलकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि यह नारा तो विपक्षियों के संदर्भ में तब बोला जाना चाहिए यदि विपक्ष उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने या सरकार गिराने में सक्षम होता। मगर भाजपा आलाकमान द्वारा उनकी जगह डॉ.मोहन यादव का मुख्यमंत्री के रूप में चयन किए जाने के बाद ‘टाईगर अभी जिंदा है’ का नारा लगाकर क्या वे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देना चाहते हैं ? शिवराज सिंह के कथनों से उनकी यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट है और यही कारण है कि उनकी इस यात्रा पर शीघ्र ही ‘ग्रहण’ लग सकता है।

 

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