कपिलसिंह चौहान
31 March, 2026
नीमच/मंदसौर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर महंगी किताबों और स्कूली सामग्री का बोझ बढ़ने लगा है। ऐसे में पड़ोसी जिले मंदसौर और नीमच में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं, जो नीमच जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है और घोर लापरवाही की और इशारा करती है। जहाँ मंदसौर में प्रशासन खुद आगे बढ़कर अभिभावकों को राहत दे रहा है, वहीं नीमच में यह जिम्मेदारी केवल एक 'पालक संघ' के कंधों पर टिकी नजर आ रही है।
मंदसौर: कलेक्टर की कमान, सीधे जनता को लाभ
मंदसौर में कलेक्टर अदिति गर्ग स्वयं इस मुहिम का नेतृत्व कर रही हैं। प्रशासन द्वारा 1 से 5 अप्रैल तक 'संजय गांधी उद्यान' में एक वृहद पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है। 2024 में शासन द्वारा हर जिले में पुस्तक मैले के आयोजन के निर्देश दिए गए थे। इसी तारतम्य में आज मंदसौर कलेक्टर ने पुस्तक मेला आयोजित करने स्वयं स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए। इस मेले में केवल किताबें ही नहीं, बल्कि यूनिफॉर्म और स्कूल बैग भी उचित दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किताबों पर 15% से 30% तक की छूट भी सुनिश्चित की गई है। प्रशासन ने एक 'पुस्तक बैंक स्टॉल' भी बनाया है जहाँ पुरानी किताबें दान की जा सकती हैं और वहीँ से नए विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें प्रदान की जायेंगी।
नीमच: संगठन के भरोसे पहल, प्रशासन मौन
इसके विपरीत, नीमच जिले में इस प्रकार का कोई सरकारी आयोजन दिखाई नहीं दे रहा है। अलबत्ता यहाँ मंदसौर प्रशासन के 6 दिवसीय मेले की अपेक्षा 'पालक संघ जिला इकाई नीमच' द्वारा दो दिवसीय, 5 और 6 अप्रैल को निःशुल्क बुक एक्सचेंज मेला लगाया जाएगा। इस पूरी तरह से स्वैच्छिक प्रयास के लिए 'पालक संघ जिला इकाई नीमच' को साधुवाद।
नीमच में ऐसे प्राप्त करें स्कूली बच्चों हेतु निःशुल्क पुस्तकें
पालक संघ जिला नीमच के जिलाध्यक्ष जगदीश शर्मा एवं महिला विंग की जिलाध्यक्ष प्रियंका कविश्वर ने इस निःशुल्क बुक एक्सचेंज मेले में पुरानी पुस्तकें दान करने वाले अभिभावकों से अपील की है कि वे बढ़ चढ़ कर पुरानी पुस्तकें दान करें। उन्होंने कहा कि जो अभिभावक मेले से पुस्तकें प्राप्त करना चाहते हैं वे विद्यालय का नाम, कक्षा तथा स्कूलों द्वारा मार्केट से बुक्स लाने हेतु प्राप्त सूची नीचे दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजें। Whatsapp नंबर – 9425973604/ 7225808182
इसे प्रशासनिक उदासीनता ही कहा जाएगा कि नीमच शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से अब तक निजी स्कूलों की मनमानी या महंगी किताबों पर लगाम लगाने के लिए इस तरह के किसी बड़े मेले या रियायती सेल की घोषणा नहीं की गई है। जिला शिक्षा विभाग का यह आचरण सीधे-सीधे स्कुल प्रबंधको और पुस्तक विक्रेताओं से सांठगांठ को उजागर करता प्रतीत होता है। इस विषय में जिला शिक्षा अधिकारी एस एम मांगरिया से फोन पर जानकारी लेने के कई प्रयासों के बाद भी संपर्क नहीं हो पाया।
अभी भी समय है कि नीमच जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को मंदसौर की तर्ज पर सक्रिय होना चाहिए। केवल संगठनों के भरोसे रहने के बजाय, विभाग को खुद आगे आकर निजी प्रकाशकों और विक्रेताओं के साथ मिलकर रियायती मेलों का आयोजन करना चाहिए, ताकि जिले के हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों को निजी स्कूलों और बुक माफियाओं के आर्थिक शोषण से बचाया जा सके।