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खोयरा से निकली पदयात्रा, कविता में परिवार का जिक्र आते ही भावुक हुईं वसुंधरा राजे

जगदीश पोरवाल 22 February, 2026 अन्य

भवानीमंडी । खोयरा (खानपुर) स्थित मुक्तेश्वर मंदिर परिसर शनिवार को जनसमर्थन और भावनाओं का साक्षी बना, जब सांसद दुष्यंत सिंह की तीसरे चरण की पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विशेष रूप से उपस्थित रहीं और उन्होंने हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया।

कार्यक्रम उस समय भावुक हो उठा, जब अदिति शर्मा द्वारा प्रस्तुत कविता में राजे के परिवार और उनके जनसेवा से जुड़े योगदान का उल्लेख किया गया। जैसे ही कविता में उनकी माता राजमाता विजय राजे सिंधिया, पिता जीवाजी राव सिंधिया और भाई माधव राव सिंधिया का जिक्र आया, राजे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं। उनकी आंखें नम हो गईं और पूरा परिसर तालियों और संवेदनाओं से गूंज उठा।

भावुक स्वर में उन्होंने कहा, “स्वर्गीय पिताजी जीवाजी राव सिंधिया, माताजी विजया राजे जी सिंधिया और भाई माधवराव सिंधिया—मेरे जीवन में इन तीनों का योगदान अमूल्य है। आज उनके बिना जीवन सूना लगता है। जब भी उनकी याद आती है, मैं आप सबके प्यार में ही उन्हें खोजने लगती हूं। जनता ही अब मेरा परिवार है।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें धन-दौलत नहीं, बल्कि जनता रूपी परिवार का स्नेह चाहिए।

राजे ने यह भी कहा, “मेरा लोगों से दल का नहीं, दिल का रिश्ता है।” उन्होंने पदयात्रा को राजनीति से ऊपर बताते हुए कहा कि यह विकास और जनसंवाद की यात्रा है—लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझने और समाधान खोजने का प्रयास है। उन्होंने दोहराया, “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” ही इस यात्रा का मूल उद्देश्य है। कार्यक्रम में “सबका सम्मान, सबका उत्थान और हर वाजिब समस्या का समाधान” का नारा भी गूंजा।

गौरतलब है कि दुष्यंत सिंह संसदीय क्षेत्र में चरणबद्ध पदयात्रा निकाल रहे हैं और यह तीसरा चरण है। परंपरा के अनुसार प्रत्येक चरण की शुरुआत वसुंधरा राजे द्वारा की जाती है। भले ही इस बार वे मुख्यमंत्री नहीं बन सकीं, लेकिन बांरा-झालावाड़ संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभा क्षेत्रों में उनका प्रभाव और जनाधार कायम है। वर्ष 1989 से क्षेत्र से उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ है और जनता के साथ उनका रिश्ता आज भी भावनात्मक रूप से मजबूत दिखाई देता है।

खोयरा की सभा ने यह संकेत दिया कि यह पदयात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनविश्वास और आत्मीय जुड़ाव की नई शुरुआत बन चुकी है। आंखों में नमी और शब्दों में अपनापन लिए वसुंधरा राजे ने एक बार फिर संदेश दिया कि राजनीति से ऊपर भी एक रिश्ता होता है—दिल का रिश्ता।

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