मनीष नायक
19 February, 2026
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नीमच। सरवानिया महाराज से जावी तक का सड़क मार्ग इन दिनों विकास नहीं बल्कि लापरवाही की खुली कहानी बयां कर रहा है। सड़क किनारे कई स्थानों पर बिना मुंडेर के गहरे खुले कुएं मौजूद हैं, जो हर गुजरते वाहन के साथ मौत का जोखिम खड़ा कर रहे हैं। विडंबना यह है कि हादसे की आशंका साफ दिखाई देने के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नदारद हैं और चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए।
हादसे का इंतज़ार क्यों?
नीमच–सिंगोली मार्ग निर्माणाधीन होने से भारी यातायात अब सरवानिया महाराज–जावी रोड से गुजर रहा है। बसें, स्कूल वाहन, बाइक और ट्रैक्टर — सभी मौत के इन गड्ढों के बिल्कुल करीब से गुजरने को मजबूर हैं। रात के अंधेरे में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जहां एक छोटी सी चूक सीधे त्रासदी में बदल सकती है।
सबक जो शायद भुला दिया गया
27 अप्रैल 2025 को मंदसौर जिले में बिना मुंडेर के कुएं में कार गिरने से 12 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। तब सुरक्षा के बड़े-बड़े वादे हुए, लेकिन सरवानिया–जावी मार्ग की स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
खुले कुओं के पास न सुरक्षा दीवार, न जाली और न ही चेतावनी संकेत — यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित खतरे को नजरअंदाज करने जैसा है। सवाल यह भी कि क्या हर बार किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी?
डेंजर जोन घोषित होने की कगार पर मार्ग
मौजूदा हालात में सरवानिया–जावी रोड आम रास्ता नहीं बल्कि संभावित “डेंजर जोन” बन चुका है। स्थानीय लोगों में डर है, तो राहगीरों में असुरक्षा — और सिस्टम अब भी खामोश।
यह खबर सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि चेतावनी है — क्योंकि एक छोटी प्रशासनिक चूक कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए लील सकती है।