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पत्थर नहीं हटेगा, लाइन झुकेगी! नगरपालिका के दरवाज़े पर ‘टेढ़ी’ इंजीनियरिंग का नमूना

द वाॅचमेन पोस्ट 18 February, 2026 अन्य

नीमच। शहर में सड़क की सफेद लाइन ने ऐसा मोड़ लिया है कि देखने वाला भी ठिठक जाए। महज़ दो किलो का पत्थर रास्ते में पड़ा था—उसे हटाने की बजाय पूरी लाइन को ही टेढ़ा कर दिया गया। नतीजा, सड़क पर बनी रेखा पत्थर को सलाम करती हुई आगे बढ़ गई।
और यह सब हुआ नगरपालिका से महज़ 40 फीट की दूरी पर। यानी निगरानी की चौखट पर ही “कामचलाऊ कारीगरी” का प्रदर्शन। स्थान भी कम दिलचस्प नहीं—पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मंजू जायसवाल के बंगले के बाहर।

 मेरा काम मशीन चलाना है…

तंज कसने वाले कह रहे हैं—शायद मशीन चलाने वाले ने मन ही मन सोचा होगा, “पत्थर हटाना मेरा काम नहीं, मुझे तो मशीन सीधी चलानी है… सामने जो आए, लाइन उसी हिसाब से मुड़ जाएगी।”
ख़ैर पत्थर अडिग रहा, सिस्टम लचक गया।

 40 फीट दूर, जवाबदेही शून्य

नगरपालिका की नाक के नीचे यह दृश्य सवाल बनकर खड़ा है। अगर यहीं पर पत्थर भारी पड़ जाए, तो दूर मोहल्लों का क्या हाल होगा?

यह टेढ़ी लाइन सिर्फ पेंट नहीं, कार्यशैली का आईना है। मन पूछ रहा है—क्या हर बाधा पर नियम मुड़ेंगे और जिम्मेदारी नहीं?

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