डेस्क न्यूज
18 February, 2026
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मंदसौर | भोपाल से लेकर उज्जैन तक भ्रष्टाचार पर बड़ी चोट! लोकायुक्त संगठन मध्य प्रदेश की सख्ती एक बार फिर देखने को मिली, जब उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने रिश्वतखोर पटवारी को रंगे हाथों दबोच लिया। पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त भोपाल के सख्त निर्देश और पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई ने सुवासरा तहसील कार्यालय में हड़कंप मचा दिया।
दरअसल, 16 फरवरी 2026 को ग्राम धलपत, तहसील सुवासरा, जिला मंदसौर निवासी दिनेश चंद्र जोशी ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि उनके बड़े भाई स्वर्गीय भगवती प्रसाद की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने विधिवत रूप से दिनेश जोशी के पुत्र आनंद जोशी को दत्तक पुत्र बनाया था। भाई के नाम दर्ज कृषि भूमि का नामांतरण आनंद जोशी के नाम करवाने के लिए जब वे हल्का पटवारी हरीश पाटीदार से मिले, तो पटवारी ने 40 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर दी। इतना ही नहीं, शिकायत के दिन ही 10 हजार रुपये पहले ही वसूल लिए गए थे।
शिकायत की गोपनीय तस्दीक के बाद उज्जैन लोकायुक्त दल ने जाल बिछाया। 18 फरवरी 2026 को तहसील कार्यालय सुवासरा में ट्रैप कार्रवाई की गई। जैसे ही पटवारी हरीश पाटीदार ने आवेदक से 30 हजार रुपये की शेष रिश्वत राशि ली, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्यालय परिसर में इस कार्रवाई से अफरा-तफरी मच गई और मौजूद लोगों में खलबली छा गई।
इस सफल ट्रैप कार्रवाई में निरीक्षक राजेंद्र वर्मा के नेतृत्व में आरक्षक उमेश जाटव, विशाल रेशमिया, नेहा मिश्रा, हितेश ललावत एवं इसरार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
लोकायुक्त की इस सख्त कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि अब रिश्वतखोरों की खैर नहीं—जो भी जनता से अवैध वसूली करेगा, वह सीधे सलाखों के पीछे जाएगा।