द वाॅचमेन पोस्ट
09 February, 2026
अपराध
नीमच। पुलिस लाइन में तैनात प्रधान आरक्षक होशियार सिंह की आत्महत्या ने पुलिस महकमे के भीतर छिपे सच को सड़क पर ला दिया है। यह अब न तो सामान्य आत्महत्या का मामला है और न ही सिर्फ जांच का विषय—यह उस सिस्टम पर सीधा आरोप है, जिसके भरोसे कानून की जिम्मेदारी टिकी होती है।
घटना के बाद पुलिस लाइन की महिलाएं बड़ी संख्या में एकजुट हुईं और सीधे एसपी कार्यालय डीआईजी निमिष अग्रवाल के समक्ष पहुंचकर अपने ही विभाग के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी। महिलाओं का कहना था कि यह मौत विभागीय दबाव, मानसिक प्रताड़ना और असंवेदनशीलता का परिणाम है।
राहत की बात हुई, लेकिन भरोसा खत्म
मीडिया से चर्चा में पुलिस लाइन की महिला सुनीता ने बताया कि डीआईजी से बच्चों के भरण-पोषण और अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई है। भरोसा दिलाया गया, की राहत कार्य में पूरा सहयोग किया जाएगा। लेकिन परिवार का कहना है कि सहायता से पहले सच्चाई सामने आना ज़रूरी है।
महिलाओं का तीखा सवाल—जांच कौन करेगा?
महिला प्रतिनिधि प्रीति राणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“जब खतरा विभाग के भीतर से ही बताया जा रहा है, तो उसी विभाग की जांच पर कैसे भरोसा किया जाए?”
जब मरने वाला लिखकर गया की मेरे विभाग वाले मुझे मार देंगे, तो विश्वास की गुंजाइश नहीं।
महिलाओं ने मजिस्ट्रियल जांच, पुलिस कंट्रोल रूम के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और पूरी तरह निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। महिलाओं का दावा है कि यह घटना पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ी है, लेकिन तथ्यों को सीमित दायरे में रखने की कोशिश हो रही है।
DIG से मिलने से रोका गया, भड़का आक्रोश
मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोप लगे कि थाना प्रभारी पुष्पा चौहान के माध्यम से महिलाओं को पुलिस लाइन में लगभग एक घंटे तक रोके रखा गया और उन्हें डीआईजी से मिलने एसपी ऑफिस तक नहीं आने दिया गया।
इस घटनाक्रम ने महिलाओं के भीतर पहले से मौजूद अविश्वास को खुली नाराज़गी में बदल दिया।
शव देखने तक की इजाज़त नहीं—परिजनों के आरोप
इससे पहले परिजनों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए । उनका कहना है कि उन्हें मृतक की शक्ल तक देखने नहीं दी गई।
शव को पुलिस वाहन में रखकर सीधे पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया
एसपी कार्यालय पहुंची महिलाओं का कहना है—
“पूरा विभाग एक साथ खड़ा दिख रहा है। ऐसे में हमें न्याय की उम्मीद नहीं।”
तीन पन्नों का सुसाइड नोट—सबसे अहम कड़ी
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल तीन पन्नों के सुसाइड नोट को लेकर है। परिजनों का दावा है कि इसमें विभाग के कुछ जिम्मेदारों पर सीधे आरोप दर्ज हैं। जो आरआई पर प्रताड़ना और पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है।
DIG का आश्वासन, लेकिन भरोसा नहीं
डीआईजी निमिष अग्रवाल ने कहा कि सभी बिंदुओं पर महिलाओं से चर्चा हुई है।
उन्होंने कहा—
“जो भी राहत और आवश्यक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। दोषियों को किसी भी स्थिति में नहीं बख्शा जाएगा। सभी सबूत जुटाए जा रहे हैं।”
लेकिन DIG से मुलाकात के बाद भी महिलाओं का कहना साफ है—“हमें पुलिस पर भरोसा नहीं है।
यह सिर्फ एक मौत नहीं, यह मामला अब एक आरक्षक की आत्महत्या से कहीं आगे निकल चुका है। जब पुलिस लाइन के भीतर ही अविश्वास इतना गहरा हो जाए कि पुलिस परिवार से जुड़ी महिलाएं अपने ही विभाग पर सवाल उठाने लगें—तो यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। अब सवाल सिर्फ आत्महत्या का नहीं है।
सवाल उस सिस्टम का है, जिसके भरोसे देश की कानून-व्यवस्था खड़ी है।