न्यूज डेस्क
03 February, 2026
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नीमच। जिले में बीते दो दिनों से हुई बेमौसम बारिश और भारी ओलावृष्टि ने किसानों को गहरी चिंता में डाल दिया है। जावद क्षेत्र सहित जिले के कई गांवों में गेहूं, अफीम, धनिया, चना, सरसों, चिरायता और संतरे जैसी प्रमुख फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस प्राकृतिक आपदा से आक्रोशित किसानों ने मंगलवार को किसान नेता राजकुमार अहीर के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र राहत की मांग की।
किसानों ने ज्ञापन में बताया कि जावद क्षेत्र के दड़ौली, मांडा, झिरमिर, महेन्द्री, जनकपुर, चड़ोल और सकतपुरिया सहित कई गांवों में बड़े आकार के ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। विशेष रूप से जनकपुर क्षेत्र में संतरे की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार जहां पहले संतरे का भाव 40 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा था, वहीं अब फसल खराब होने के कारण मजबूरी में 15 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने की स्थिति बन गई है।
किसान नेता राजकुमार अहीर ने बताया कि पूरे नीमच जिले में हुई इस आपदा से किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक नुकसान अफीम, संतरा और गेहूं की फसलों में हुआ है। किसानों की मांग है कि राजस्व विभाग एवं नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी तत्काल खेतों पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और ईमानदारी से फसल सर्वे किया जाए।
ज्ञापन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा क्लेम शीघ्र दिलाने तथा राज्य शासन से पर्याप्त मुआवजा प्रदान करने की मांग की गई है। किसान नेता अहीर ने आरोप लगाया कि हाल ही में जावद क्षेत्र में एसडीएम द्वारा किया गया सर्वे केवल औपचारिकता तक सीमित रहा और एक ही स्थान पर बैठकर किया गया, जिससे वास्तविक नुकसान सामने नहीं आ पाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फसल सर्वे कागजों पर नहीं, बल्कि किसानों के खेतों में जाकर किया जाना चाहिए।
इस दौरान जनकपुर, मांडा, महेन्द्री, झिरमिर, दड़ौली, चड़ोल और सकतपुरिया सहित कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द सर्वे कार्य पूरा कर सभी प्रभावित किसानों को निष्पक्ष रूप से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस आपदा से उबर सकें।