न्यूज डेस्क
02 February, 2026
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नीमच। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने न्यायिक आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर परिषद कुकड़ेश्वर और जिला प्रशासन को सीधा संदेश दिया है। अब टालमटोल नहीं, आदेश का पालन अनिवार्य है।
30 जनवरी 2026 अवमानना याचिका पर सुनवाई
याचिकाकर्ता बंशीलाल माली द्वारा अधिवक्ता सहज चौधरी के माध्यम से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश के पालन के लिए तीन माह की अंतिम मोहलत तय कर दी है।
क्या है पूरा मामला
उच्च न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2024 को आदेश पारित करते हुए नगर परिषद कुकड़ेश्वर को निर्देश दिए थे कि वर्तमान सब्जी मंडी को सुरक्षित और वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। इसके बाद वहां हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए
साथ ही नीमच जिला कलेक्टर को निर्देश दिए गए थे कि सार्वजनिक धन की बर्बादी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ वसूली और दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
रिव्यू पिटीशन भी खारिज
नगर परिषद कुकड़ेश्वर ने इस आदेश को रिव्यू पिटीशन के माध्यम से चुनौती दी थी, लेकिन माननीय हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2025 को इसे निरस्त कर दिया।
फिर भी आदेश की अनदेखी
रिव्यू खारिज होने के बाद भी जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो अवमानना याचिका दाखिल की गई।
अब हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है यदि आदेश की सर्टिफाइड कॉपी मिलने के तीन माह के भीतर 23.10.2024 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्यवाही शुरू होगी।
न्यायालय का स्पष्ट संदेश
माननीय उच्च न्यायालय के इस आदेश ने साफ कर दिया है कि—
न्यायिक आदेशों की अवहेलना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब गेंद प्रशासन और नगर परिषद के पाले में है।
तीन महीने बाद या तो कार्रवाई दिखेगी, या फिर अफसरों की जवाबदेही तय होगी।
कुकड़ेश्वर नगर परिषद के लिए यह चेतावनी नहीं, आखिरी मौका है।