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फसल तबाही के बाद सड़क पर उतरे किसान, आंदोलन हुआ हाईजेक— नीमच में चक्काजाम, प्रशासन–नेता आमने-सामने, विधायक परिहार पर गुस्सा, विधायक मारू के मुरीद हुए किसान

तबरेज अगवान  02 February, 2026 अन्य

नीमच (तबरेज अगवान) | रविवार की बेमौसम तूफानी बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत को मिनटों में रौंद दिया। खड़ी फसलें ज़मीन पर बिछ गईं। उम्मीदें टूट गईं।
और फिर… किसान सड़क पर उतर आए।

दो दर्जन से ज्यादा गांव, सैकड़ों किसान

नीमच–महू–नसीराबाद हाईवे किसानों की रणभूमि बन गया। ओलावृष्टि से तबाह हुए 20 से ज्यादा गांवों के किसान न्याय की आस में भंवरासा फंटे पर जुटे। जिनमें भंवरासा, पालसोड़ा, मेलकी–मेवाड़, मनासा खुर्द, पामाखेड़ा, बिश्निया, दीपूखेड़ी, झारड़ा, बाबुलखेड़ा, फतेहगढ़, बरखेड़ी, बरखेड़ा पंथ सहित करीब एक हजार किसान एक स्वर में बोले—
“मुआवज़ा चाहिए, अभी चाहिए।”

 सुबह 9 बजे भीड़, 10:35 पर चक्काजाम

सुबह 9 बजे से किसान जुटने लगे। 10 बजकर 35 मिनट पर सड़क ठप हुई। 
नीमच–महू–नसीराबाद मार्ग पर जीवन थम गया।
पुलिस ने कहा—
“11:30 का समय तय है, अभी जाम नहीं।”
20 मिनट की तीखी बहस चली। 10:55 पर जाम खुला।
लेकिन यह शांति… अस्थायी थी।

11:25 पर फिर चक्काजाम—नारे, आक्रोश, ललकार

घड़ी ने 11:25 दिखाया।
किसान फिर बैठे। नारे गूंजे।
गुस्सा फूटा। मांग एक—न्यायसंगत मुआवज़ा।

प्रशासन पूरी ताकत के साथ मैदान में

मौके पर तैनात रहे—
अपर कलेक्टर बी.एस
कलेश, एएसपी नवलसिंह सिसोदिया, सीएसपी किरण चौहान, तहसीलदार गजेंद्रनाथ, सिटी थाना प्रभारी पुष्पा सिंह चौहान,
जीरन थाना प्रभारी उमेश यादव, हर्कियाखाल चौकी प्रभारी रामपाल सिंह राठौर, साथ में भारी पुलिस बल।

आंदोलन हाईजेक हो गया !

ग्रामीण किसानों की रणनीति साफ थी— गैर-राजनीतिक आंदोलन, ताकि आवाज़ दूर तक जाए।
लेकिन मैदान में राजनीति उतर आई। कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती, कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह तोमर, दिग्विजय सिंह आमलीखेड़ा, विक्रम सिंह, विनोद सिंह किसानों के बीच सड़क पर दिखे।

माइक पर टकराव—ASP बनाम कांग्रेस नेता

माइक पर माहौल गरमाया।
एएसपी सिसोदिया बोले:
“रास्ता खोलो, दूसरों की समस्या मत बनाओ, राजनीति मत करो।”
तोमर पलटे:
“यह माइक हमारा है।
बोलना है तो अपना माइक लाओ।
हम तो पहले से मरे हुए हैं,
सीने पर गोली चलवा दो।”
“गोली चलवा दो”—
यह वाक्य बार-बार दोहराया गया। माहौल और सुलग उठा।

टूटी उम्मीदों की आवाज

कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती बोले— “सर्वे और मुआवज़े की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि किसान उम्मीद खो देता है।
आज सड़क पर उतरना उसी टूटी उम्मीद का नतीजा है।

 विधायक परिहार पर गुस्सा, मनासा विधायक की तारीफ

किसानों का आक्रोश विधायक दिलीप सिंह परिहार पर साफ दिखा। नारे लगे। नाराज़गी खुलकर सामने आई। वहीं किसानों ने मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू की तारीफों के पुल बांधे—
“वो खेत-खेत घूम रहे हैं,
प्रशासन को हकीकत दिखा रहे हैं, हमारा विधायक नदारद है।”

दो किलोमीटर तक जाम, यात्री फंसे

चक्काजाम के दौरान दोनों ओर करीब 2–2 किलोमीटर तक वाहन फंसे।
नीमच की ओर से वाहन जीरन होकर मल्हारगढ़ निकाले गए।
मंदसौर की ओर से आने वाले वाहन बुरी तरह फंसे रहे। कई यात्री बसों में यात्री घंटों परेशान रहे।

समाधान या अस्थायी सुलह?

अपर कलेक्टर बी.एस. कलेश की समझाइश, कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप के बाद 12:30 बजे जाम खुला। अपर कलेक्टर कलेश, तरुण बाहेती और किसान खेतों में पहुंचे।
आधे घंटे से ज्यादा मौके पर स्थिति का जायजा लिया। बर्बाद फसलों में अफ़ीम, गेहूं, सरसों , अश्वगंधा, चिया सहित कई फसलों को शामिल किया गया है।
फैसला हुआ कि  7 दिवस में सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। मुआवजे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। नतीजा किसान माने। सड़क खुली। लेकिन चेतावनी के साथ—
“अगर 7–15 दिन में सुनवाई नहीं हुई,
तो अगली बार चक्काजाम नहीं, आर-पार होगा।”
यह सिर्फ आंदोलन नहीं था—यह किसानों की टूटती उम्मीदों की चीख थी।

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