न्यूज डेस्क
01 February, 2026
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नीमच। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार 1 फरवरी को पेश किए गए देश के 80वें और अपने 9वें केंद्रीय बजट को लेकर नीमच जिले में मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर आर्थिक विशेषज्ञों, गृहिणियों और छात्रों तक—हर वर्ग ने बजट को अलग-अलग नजरिये से देखा। आम नागरिकों का कहना है कि बजट में “विजन 2047” की झलक तो दिखाई देती है, लेकिन वर्तमान महंगाई, रोजगार और टैक्स राहत जैसे जमीनी मुद्दों पर ठोस समाधान की कमी महसूस हुई है।
कांग्रेस के पूर्व विधायक डॉ. संपत स्वरूप जाजू ने बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बजट का उद्देश्य सालभर की आय-व्यय और विकास योजनाओं का स्पष्ट रोडमैप देना होता है, लेकिन बीते 6–7 बजटों में की गई कई घोषणाएं आज भी कागजों तक ही सीमित हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति जस की तस बनी हुई है—सड़कें बदहाल हैं, हवाई सेवाएं शुरू नहीं हो पाईं, रेलवे परियोजनाओं को अब तक स्वीकृति नहीं मिली और नई ट्रेनों की सौगात भी नहीं मिली। डॉ. जाजू के अनुसार यह बजट आम जनता को भ्रमित करने वाला है और मंदसौर-नीमच संसदीय क्षेत्र के लिए इसमें कोई ठोस लाभ नजर नहीं आता।
वहीं चार्टर्ड अकाउंटेंट पीयूष कड़ावत ने बजट के तकनीकी पहलुओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नए इनकम टैक्स प्रावधानों में करदाताओं को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। टैक्स स्ट्रक्चर में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि कुछ करों में बढ़ोतरी जरूर देखने को मिली। उन्होंने माना कि बजट को संतुलित रखने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने की कोशिश की गई है, लेकिन आम आदमी की जेब पर इसका तात्कालिक सकारात्मक असर नजर नहीं आता। सोना-चांदी और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को लेकर भी कोई खास राहत नहीं दी गई।
इसके विपरीत भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं कर सलाहकार निलेश पाटीदार ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि यह सर्वव्यापी और समावेशी बजट है। उन्होंने बताया कि कृषि को लाभ का धंधा बनाने, किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार से जोड़ने और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। 12 लाख रुपये तक के इनकम टैक्स स्लैब को यथावत रखा गया है और प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। औद्योगिक प्रोत्साहन और स्टार्टअप नीतियों से युवाओं, महिलाओं और बेरोजगारों को आने वाले समय में लाभ मिलेगा।
गृहिणी मनीषा सिंघल ने बजट पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हर साल उम्मीद रहती है कि घरेलू उपयोग की वस्तुएं—जैसे गैस सिलेंडर, तेल, दालें और राशन—सस्ती हों, लेकिन इस बार भी गृहिणियों को कोई सीधी राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि सभी महिलाएं रोजगार से नहीं जुड़ सकतीं, ऐसे में गृहिणियों के लिए विशेष योजनाओं और जेब खर्च को ध्यान में रखकर राहत दी जानी चाहिए थी।
छात्र विश्वास शर्मा ने कहा कि बजट में एमएसएमई के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देना सराहनीय है, लेकिन अधिकांश युवा आज भी सरकारी नौकरियों की ओर देख रहे हैं। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और जटिल चयन प्रक्रिया के कारण युवाओं के सपने अधूरे रह जाते हैं। लोन लेने के डर और कम वेतन वाली निजी नौकरियों की मजबूरी युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने सरकारी रोजगार के अवसर बढ़ाने और चयन प्रक्रिया को सरल करने की मांग की।
गौरतलब है कि बजट में रेल परियोजनाओं, एम्स, आयुर्वेदिक संस्थानों, टैक्स फाइलिंग सुधार, गर्ल्स हॉस्टल और टियर-2 व टियर-3 शहरों के विकास जैसी कई घोषणाएं की गई हैं। मध्यप्रदेश के 55 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल, 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के विकास के लिए भारी आवंटन और एवीजीसी सेक्टर को बढ़ावा देने की योजनाएं भी इसमें शामिल हैं।
इस बजट का सीधा प्रसारण नीमच स्थित भाजपा कार्यालय में देखा गया, जहां विधायक दिलीप सिंह परिहार, भाजपा जिला अध्यक्ष वंदना खंडेलवाल, जिला उपाध्यक्ष नीलेश पाटीदार, महेंद्र भटनागर, हेमंत हरित सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 को लेकर नीमच में राय बंटी हुई नजर आई—किसी को भविष्य की संभावनाएं दिखाई दीं, तो किसी को वर्तमान में राहत की कमी खली।