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नीमच कैंट और सिटी में धूमधाम से मना 49वां श्री विश्वकर्मा जन्म महोत्सव, भव्य शोभायात्राओं में उमड़ा समाज

न्यूज डेस्क 31 January, 2026 अन्य

नीमच | नीमच कैंट और नीमच सिटी में शनिवार को जांगिड़ ब्राह्मण समाज द्वारा 49वां श्री विश्वकर्मा जन्म महोत्सव श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के साथ भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर दोनों ही क्षेत्रों में धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक आयोजनों और विशाल शोभायात्राओं की श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें समाजजनों की बड़ी संख्या में सहभागिता देखने को मिली। पूरा नगर भक्ति, उल्लास और परंपरागत रंगों से सराबोर नजर आया।

नीमच कैंट के जवाहर नगर स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर एवं नीमच सिटी के खेड़ी मोहल्ला स्थित चारभुजा मंदिर से भव्य चल समारोह निकाले गए। शोभायात्रा में समाज के पुरुष श्वेत वस्त्रों में तथा महिलाएं लाल व पीली साड़ी-चुनरी धारण कर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं। बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर भक्ति भजन गूंजते रहे, वहीं ढोल की थाप और डीजे की धुनों पर महिलाएं एवं बालिकाएं उत्साहपूर्वक नृत्य करती नजर आईं। चल समारोह के अंतिम छोर पर रथ में विराजित भगवान श्री विश्वकर्मा की आकर्षक तस्वीर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

महोत्सव कार्यक्रमों के तहत शनिवार सुबह 9 बजे हवन एवं गणपति पूजन का आयोजन किया गया। इसके पश्चात दोपहर 1 बजे भव्य श्री विश्वकर्मा शोभायात्रा निकाली गई। शाम 5 बजे पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह आयोजित हुआ, जबकि शाम 6:30 बजे महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।

पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सदस्य विनय जांगिड़, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार, नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने समाज की एकता, परंपरा और संगठनात्मक शक्ति की सराहना की।

इसी क्रम में नीमच सिटी जांगिड़ ब्राह्मण समाज द्वारा चारभुजा मंदिर पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए, जिसके बाद जल समारोह प्रारंभ हुआ। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई फव्वारा चौक पहुंची, जहां नीमच कैंट और नीमच सिटी की शोभायात्राओं का भव्य संगम हुआ। संगम के बाद दोनों चल समारोह अपने-अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए, जहां मंचीय कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण एवं अन्य धार्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। 49वें श्री विश्वकर्मा जन्म महोत्सव ने समाज में एकता, संस्कृति और परंपराओं के प्रति आस्था को और अधिक सशक्त किया।

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