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नीमच का बेटा, मंदसौर में ड्यूटी… ज़हर का घूंट और टूटी सांसें, पुलिस जवान की मौत से उठे कई सवाल

न्यूज डेस्क 31 January, 2026 अन्य

मंदसौर \ नीमच | खामोश रात, बुझता हुआ एक चिराग और वर्दी में लिपटा टूटा हुआ सपना… मंदसौर से आई यह खबर दिल को झकझोर देने वाली है। कानून की रखवाली करने वाला एक आरक्षक खुद जिंदगी की जंग हार गया। सिटी कोतवाली में पदस्थ आरक्षक धर्मेंद्र सिंह पंवार की मौत ने पुलिस विभाग से लेकर आमजन तक को गहरे शोक में डुबो दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरक्षक धर्मेंद्र सिंह पंवार ने कथित तौर पर चूहे मारने की दवा का सेवन कर लिया था। जहरीले पदार्थ का असर होते ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। गुरुवार रात उन्हें संजीत नाका ओवरब्रिज के आगे शुभकामना रिसोर्ट के पास अचेत अवस्था में पाया गया। परिचितों को सूचना मिलने पर उन्हें तत्काल मंदसौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रातभर इलाज चलता रहा, लेकिन इंदौर ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

धर्मेंद्र सिंह पंवार मूल रूप से नीमच जिले के पामाखेड़ा गांव के निवासी थे और 26 जनवरी से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे थे। इस दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर ऐसा कौन सा मानसिक या पारिवारिक दबाव था, जिसने एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

बताया जा रहा है कि धर्मेंद्र को पुलिस विभाग में नौकरी अनुकंपा नियुक्ति के तहत मिली थी। करीब 10 वर्ष पहले उनके पिता फतेह सिंह पंवार, जो प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे, का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। पिता की मौत के बाद बेटे को विभाग ने सहारा दिया, लेकिन अब वही बेटा असमय दुनिया छोड़ गया।

धर्मेंद्र अपने पिता के इकलौते पुत्र थे। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे अपने पीछे 8 साल और डेढ़ साल के दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी दो बहनें हैं, जिनका विवाह हो चुका है। घर में अब सिर्फ मातम, सिसकियां और अनगिनत सवाल रह गए हैं।

मामले में कोतवाली थाना प्रभारी पुष्पेंद्र शहर राठौर ने बताया कि आरक्षक ने जहरीले पदार्थ का सेवन किया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हुई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

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