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जब अपनों ने मोड़ लिया मुंह और हालातों ने कस ली गर्दन… मौत की पटरी पर खड़ा था शख्स, मगर एक ब्रेक ने छीन लिया काल का अधिकार! नीमच रेलवे स्टेशन पर थर्रा देने वाला मंजर

न्यूज डेस्क 29 January, 2026 अन्य

नीमच। कभी-कभी जिंदगी इतनी बेरहम हो जाती है कि इंसान खुद ही अपनी मौत की पटकथा लिख देता है। अपनों की बेरुखी, आर्थिक तंगी और टूटती उम्मीदों के बीच एक शख्स ने तय कर लिया था कि अब बस… बहुत हो चुका। गुरुवार को नीमच रेलवे स्टेशन पर ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मंजर सामने आया, जब एक 55 वर्षीय व्यक्ति अपनी जिंदगी खत्म करने के इरादे से चलती ट्रेन के सामने कूद गया।
स्टेशन पर मौजूद लोगों ने पलभर के लिए सांसें थाम लीं। मौत सामने खड़ी थी, बस एक सेकेंड का फासला था। लेकिन तभी किस्मत ने करवट ली—और एक ब्रेक ने मौत को मात दे दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम जमुनिया कला निवासी 55 वर्षीय राजेश पाटनी, पिता शांतिलाल पाटनी, गुरुवार को नीमच रेलवे स्टेशन पहुंचा था। वह काफी देर तक प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर भटकता रहा। उसकी आंखों में अजीब सा खालीपन था, चेहरे पर बिखरा दर्द और चाल में असहजता। यात्रियों और स्थानीय लोगों को उसके हाव-भाव से अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने तत्काल जीआरपी पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति पर नजर रखने लगी। लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, राजेश ने रतलाम से आगरा जा रही आगरा फोर्ट एक्सप्रेस के सामने अचानक छलांग लगा दी। प्लेटफॉर्म पर चीख-पुकार मच गई। लोगों को लगा अब सब खत्म…
लेकिन ट्रेन के लोको पायलट की पैनी नजर और फौलादी हौसले ने चमत्कार कर दिखाया। खतरा भांपते ही उसने बिना एक पल गंवाए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। ट्रेन चीखती हुई थमी—और मौत थम गई।
लोको पायलट की सूझबूझ से युवक की जान बच गई। तुरंत जीआरपी पुलिस ने पटरी पर गिरे युवक को बाहर निकाला। घटना में उसे शरीर के कुछ हिस्सों में मामूली चोटें आईं, जिनका प्राथमिक उपचार कराया गया।
इसके बाद जो सामने आया, उसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर दिया। काउंसलिंग के दौरान राजेश फूट-फूटकर रो पड़ा। उसने बताया कि पारिवारिक उपेक्षा और आर्थिक तंगी ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। “कोई मुझे प्यार नहीं करता… कोई रखने को तैयार नहीं,” कहते हुए उसकी आवाज कांप रही थी। वह लंबे समय से मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहा था और खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा था।
जीआरपी थाना प्रभारी के.एल. भाटी ने बताया कि यात्रियों की सजगता, समय रहते मिली सूचना और लोको पायलट की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। युवक की काउंसलिंग कर उसे समझाइश दी गई और बाद में परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के चेहरे पर एक तमाचा है। सवाल यह है—अगर अपनों का सहारा वक्त पर मिल जाता, तो क्या कोई मौत की पटरी तक जाता?
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में नजर आए, तो उसे नजरअंदाज न करें। एक फोन कॉल, एक बातचीत… किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।

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