डेस्क न्यूज
06 January, 2026
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नीमच। नगरपालिका नीमच की बहुचर्चित योजना क-23 के भूखंड क-2 को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा पार्षदों ने नगर सुधार न्यास एवं नगरपालिका के तत्कालीन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोषपूर्ण, अवैधानिक और षड्यंत्रपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की है। इस संबंध में भाजपा पार्षदों ने एक विस्तृत लिखित ज्ञापन प्रस्तुत कर उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में बताया गया कि योजना क-23 का निर्माण तत्कालीन नीमच नगर सुधार न्यास द्वारा दशहरा मैदान क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक के समीप किया गया था। यह क्षेत्र शहर का अत्यंत प्रमुख और व्यावसायिक मार्ग माना जाता है, जहां गाइडलाइन के अनुसार भूमि का मूल्य काफी अधिक था। इसके बावजूद आरोप है कि नगर सुधार न्यास के अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ के तहत वाणिज्यिक भूखंडों की कीमत जानबूझकर कम निर्धारित की और ओने-पोने दामों पर भूखंडों के विक्रय के लिए निविदाएं प्रकाशित करवाईं, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि हुई।
भाजपा पार्षदों का कहना है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा योजना क-23 के भूखंडों के अभिविन्यास को अनुमोदन ही नहीं दिया गया था। इसके बावजूद नियमों को दरकिनार करते हुए भूखंड क-2 का विक्रय कर दिया गया। नगर सुधार न्यास के विघटन के बाद जब इस आवंटन पर आपत्तियां सामने आईं, तो तत्कालीन नगरपालिका अधिकारियों ने आवंटन निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ की थी, लेकिन कथित दबाव और सांठगांठ के चलते यह कार्रवाई अधर में लटक गई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि भूखंड क-2 का प्रथम पट्टानामा 16 जुलाई 2002 को कृष्ण कुमार गट्टानी के नाम निष्पादित किया गया था, जिसमें स्पष्ट शर्त थी कि 10 वर्षों तक भूखंड का विक्रय नहीं किया जा सकेगा। इसके बावजूद 17 नवंबर 2009 को उक्त भूखंड लीलादेवी सिंघल को विक्रय कर दिया गया, जो पट्टे की शर्तों का खुला उल्लंघन है। इस स्थिति में पट्टानामा स्वतः निरस्त होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट नामांतरण कर लीलादेवी सिंघल के पक्ष में नया पट्टानामा जारी कर दिया गया।
भाजपा पार्षदों ने बताया कि इस मामले में 6 मार्च 2019 को अधिवक्ता महेश पाटीदार से विधिक अभिमत लिया गया था, जिसमें भूखंड का आवंटन अवैधानिक बताया गया। इसके बावजूद बाद में पुनः नया विधिक अभिमत लेकर वर्ष 2021 में भूखंड को फ्रीहोल्ड घोषित करते हुए निर्माण अनुमति जारी कर दी गई, जिसे पार्षदों ने पूरी तरह नियमविरुद्ध और षड्यंत्रपूर्ण करार दिया है।
भाजपा पार्षदों ने मांग की है कि योजना क-23 की संपूर्ण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अनुमोदन के अभाव में योजना को निरस्त किया जाए तथा भूखंड क-2 को पुनः नगरपालिका के कब्जे में लेकर नवीन नियमों के तहत पुनः आवंटन किया जाए, ताकि शासन को हुई राजस्व हानि की भरपाई हो सके।
इस दौरान भाजपा पार्षद शशि कल्याणी, रूपेंद्र लोक्स एवं योगेश कवीश्वर उपस्थित रहे। पार्षदों ने प्रशासन से शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है |