डेस्क न्यूज
24 December, 2025
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मनासा | राजस्थान के झालावाड़ जिले के पगारिया थाना क्षेत्र में अफीम तस्करी के एक मामले की आंच मंगलवार को मनासा तक पहुंच गई। मक्का के कट्टों में छिपाकर ले जाई जा रही 1 किलो 800 ग्राम अफीम की बरामदगी के बाद राजस्थान पुलिस द्वारा मनासा के एक अनाज व्यापारी को पूछताछ के लिए लाए जाने से शहर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
जैसे ही व्यापारी को थाने लाए जाने की खबर फैली, बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्रामीण मनासा थाने पहुंच गए और बिना ठोस सबूत के कार्रवाई का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद मामला तब शांत हुआ, जब सीसीटीवी फुटेज से व्यापारी की बेगुनाही साबित हुई।
कैसे शुरू हुआ मामला
पगारिया थाना पुलिस ने डग रोड स्थित वॉशिंग पॉइंट के पास वाहन चेकिंग के दौरान एक लोडिंग ऑटो की तलाशी ली थी। ऑटो में मक्का के कट्टों के बीच अफीम छिपाकर रखी गई थी। इस मामले में पुलिस ने मनासा के वार्ड क्रमांक 2 निवासी युनूस कुजड़ा को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में युनूस ने मक्का मनासा के अनाज व्यापारी प्रफुल्ल पोरवाल से खरीदने की बात कही। इसी आधार पर राजस्थान पुलिस व्यापारी को पूछताछ के लिए मनासा थाने लेकर पहुंची।
रात में थाने का घेराव, व्यापारियों का आक्रोश
व्यापारी को थाने लाए जाने की सूचना मिलते ही व्यापारियों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना था कि सिर्फ बयान के आधार पर स्थानीय व्यापारी को परेशान किया जा रहा है। आक्रोशित लोगों ने रात में थाने का घेराव कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
सीसीटीवी फुटेज से साफ हुई तस्वीर
व्यापारियों और परिजनों ने पुलिस को दुकान के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए, जिसमें साफ दिखा कि व्यापारी की दुकान से केवल दो बोरी मक्का की सामान्य बिक्री हुई थी। न तो अफीम और न ही किसी संदिग्ध गतिविधि का कोई प्रमाण सामने आया।
सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने व्यापारी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया।
व्यापारी का पक्ष
व्यापारी प्रफुल्ल पोरवाल ने बताया कि एक व्यक्ति दुकान पर आया था, जिसने दो बोरी मक्का खरीदी थी और बाद में टेम्पो आने पर लोड करने को कहा था।
“मेरा अफीम या किसी अवैध गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है,” उन्होंने स्पष्ट किया।
पुलिस का बयान
मनासा थाना प्रभारी शिव रघुवंशी ने बताया कि अफीम राजस्थान पुलिस द्वारा पकड़ी गई थी और व्यापारी को केवल पूछताछ के लिए लाया गया था।
सबूतों के बाद मिली राहत
पूरे घटनाक्रम में सीसीटीवी फुटेज निर्णायक साबित हुए, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हुई और व्यापारी को राहत मिली।