डेस्क न्यूज
03 December, 2025
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नीमच। जमुनियाकला स्थित धानुका सोया प्लांट की जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली पर उठे सवालों के बाद पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PCB) उज्जैन टीम के निरीक्षण का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद पहली बार प्लांट से निकलने वाला बदबूदार व रासायनिक मिश्रण वाला गंदा पानी पूरी तरह बंद हो गया है। इससे अनेक शंकाएँ और गहरी हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, PCB टीम के लौटते ही फैक्ट्री प्रबंधन ने तेजी से उन सभी क्षेत्रों की सफाई शुरू कर दी, जहाँ पहले दूषित पानी खेतों और नालों तक बह रहा था। पिछले 7 दिनों से प्लांट परिसर के आसपास जेसीबी मशीनें लगातार सक्रिय देखी गईं। आरोप है कि प्रबंधन ने जमीन में जमा रासायनिक पानी के निशान, गुजरने वाले रास्ते और गड्ढों को मिटाने का बड़ा अभियान चलाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब से फैक्ट्री शुरू हुई, तब से लगातार खेतों में रासायनिक पानी छोड़ा जाता रहा, जिससे फसलें, मिट्टी और कुएँ प्रभावित हुए। लेकिन PCB निरीक्षण के तुरंत बाद अचानक डिस्चार्ज रुक जाना कई जवाब अपने आप तलाशता हुआ प्रतीत होता है। इससे यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि—क्या ZLD प्रणाली पहले वाकई चालू थी या केवल कागजों में?
इसी बीच एक और बड़ा आरोप सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाला दूषित पानी टैंकरों में भरकर रातों-रात फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा खरीदी गई बाउंड्रीवॉल वाले निजी खेतों में डाला जा रहा है। यदि यह सच है, तो यह गंभीर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है।
ग्रामीण अब PCB की लैब रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा प्लांट की निरंतर निगरानी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सिर्फ पानी बंद होना समाधान नहीं है, असली मुद्दा भविष्य में फिर से प्रदूषण न फैलने देना है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, PCB की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही प्लांट के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होगी। मामले को लेकर स्थानीय जनों की नजरें अब पूरी तरह प्रशासन और PCB की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।