डेस्क न्यूज
17 November, 2025
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नीमच। भारतीय मजदूर संघ और आशा कार्यकर्ता महासंघ ने सोमवार को श्रमिकों और आशा कार्यकर्ताओं से संबंधित विभिन्न लंबित मांगों को लेकर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर सहित कई श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संगठन ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सरकार से पूर्व में की गई घोषणाओं को लागू करने और लंबित समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की। आशा एवं सहयोगिनी कार्यकर्ता महासंघ ने कहा कि 6 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा आशा एवं उषा कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गई थीं, लेकिन आज तक उन पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। सबसे गंभीर स्थिति प्रोत्साहन राशि को लेकर है, जो चार माह से लंबित है। भुगतान न होने से अधिकांश आशा बहनें आर्थिक संकट में हैं और उनके परिवारों पर भारी प्रभाव पड़ा है। महासंघ ने मांग की कि लंबित प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए, प्रति वर्ष ₹1000 की घोषित वृद्धि लागू की जाए और आशा कार्यकर्ताओं की सेवा में सेवानिवृत्ति आयु सीमा को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को ईपीएफ–ईएसआईसी में शामिल करने, न्यूनतम ₹18,000 मासिक वेतन (सुपरवाइजर के लिए ₹24,000), दुर्घटना या मृत्यु पर ₹10 लाख मुआवजा, दो बार गणवेश, यात्रा भत्ता, चिकित्सालयों में विश्राम कक्ष, स्कूटी और मोबाइल सुविधा प्रदान करने जैसी कई मांगें भी प्रमुख रहीं। भारतीय मजदूर संघ ने भी प्रदेश स्तर पर श्रमिक–कर्मचारी से संबंधित समस्याओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इसमें आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा नीति, दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण, संविदा नीति में सुधार, बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियाँ दूर करने, लिपिक वर्ग का समयमान वेतनमान, पटवारी वेतनमान उन्नयन, फार्मासिस्टों का पदनाम परिवर्तन, पंचायत सचिवों का संविलियन, वरिष्ठ नागरिक आयोग गठन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 50% पदोन्नति और रसोइयों का मानदेय ₹10,000 करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल थीं। संगठनों ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन देने के बावजूद कर्मचारियों की जमीनी परिस्थितियाँ नहीं सुधर रहीं। विशेष रूप से आशा कार्यकर्ता, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं, आज भी सम्मानजनक वेतन और सुरक्षा से वंचित हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, टीकाकरण और बीमारी निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी निभाती हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिलता है और न ही सुरक्षा। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।