डेस्क न्यूज
15 November, 2025
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मंदसौर। पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के 22 वर्षीय बेटे हर्शुल जैन उर्फ हनी द्वारा रची गई फर्जी किडनैपिंग की कहानी का पुलिस ने 24 घंटे से भी कम समय में पर्दाफाश कर दिया। आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज से परेशान हर्शुल ने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर खुद का अपहरण दिखाने और परिवार से 50 लाख रुपये फिरौती मांगने की योजना बनाई थी।
शामगढ़ पुलिस के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी इंजीनियर कमल जैन का परिवार सर्किट हाउस के पीछे बने सरकारी बंगले में रहता है। गुरुवार सुबह हर्शुल कोटा जाने के लिए निकला था। दोपहर करीब 4 बजे हर्शुल के मोबाइल से परिवार को कॉल आया जिसमें अपहरणकर्ताओं ने 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। शिकायत पर पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और एसपी विनोद कुमार मीणा के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई।
तकनीकी जांच में जल्द ही कई विरोधाभास सामने आए। मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स ने पुलिस के शक को गहरा किया। इसके बाद पुलिस ने हर्शुल के करीबी दोस्त गणपत सिंह को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में उसने वो सच बताया जिसने इस ‘अपहरण’ की कहानी को पलट दिया।
गणपत ने खुलासा किया कि हर्शुल गहरे कर्ज में डूबा हुआ था। आर्थिक दबाव के कारण उसने खुद ही अपहरण का ड्रामा रचा। इस साजिश में गणपत सिंह, जनरल सिंह (बलौदा, बूंदी) और कुलदीप अमरालिया (चौराया, बूंदी) शामिल थे। हर्शुल को भरोसा था कि परिवार 50 लाख रुपये की व्यवस्था कर देगा और वह अपना पूरा कर्ज चुका सकेगा।
जांच में सामने आया कि हर्शुल कोटा में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाता था और कूलर जाली फैक्ट्री शुरू करने की तैयारी में था। साथ ही वह एक स्थानीय देशी चाय दुकान भी चलाता था। इन सभी व्यवसायों में हुए नुकसान और बढ़ते कर्ज ने उसे अपराध की राह पर धकेल दिया।
फिलहाल पुलिस ने हर्शुल और गणपत को हिरासत में लिया है, जबकि जनरल सिंह और कुलदीप अमरालिया फरार हैं। उनकी तलाश में कोटा और बूंदी क्षेत्रों में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
एसपी विनोद कुमार मीणा ने बताया कि शुरुआती जांच में स्पष्ट हो गया है कि पूरा अपहरण हर्शुल की खुद की साजिश थी। उन्होंने कहा कि पुलिस तकनीकी पहलुओं और पैसों के लेनदेन की पूरी जांच कर रही है। फरार आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।