डेस्क न्यूज़
30 October, 2025
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नीमच | नीमच जिले में दो दिनों के भीतर दो बड़ी बस दुर्घटनाएँ टल गईं — एक में सड़क किनारे खड़ा पेड़ यात्रियों की जान का रक्षक बन गया, तो दूसरी घटना में कीचड़ ने बस को पलटने से बचा लिया। लेकिन इन घटनाओं ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक यात्रियों की जान ड्राइवरों की लापरवाही के भरोसे छोड़ी जाएगी?
गुरुवार सुबह नीमच से जावी जा रही निलेश्वरी बस बोरखेड़ी के पास अनियंत्रित होकर खाई में उतर गई। बस जैसे ही नीचे लुढ़कने लगी, उसी वक्त सड़क किनारे खड़ा एक विशाल पेड़ उसके रास्ते में आ गया और बस वहीं अटक गई। पेड़ ने बस को पलटने से बचा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
घटना में चार यात्री मामूली रूप से घायल हुए, जिन्हें उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हादसे की जानकारी मिलते ही तहसीलदार संतोष कुमार मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस तेज रफ्तार में मोड़ पर पहुंची थी और चालक नियंत्रण खो बैठा।
इधर, बुधवार को नीमच-चित्तौड़गढ़ मार्ग पर मीनाक्षी बस भी एक बड़ी दुर्घटना से बाल-बाल बची। निर्माणाधीन सड़क पर चलते हुए चालक ने डायवर्जन छोड़कर बस को कच्ची सड़क पर मोड़ दिया। नतीजा — बस एक ओर से फिसलकर कीचड़ में धंस गई। सौभाग्य से बस पलटी नहीं, वरना हादसा भयावह हो सकता था। बाद में जेसीबी की मदद से बस को बाहर निकाला गया और दूसरी बस से यात्रियों को रवाना किया गया।
दोनों घटनाओं ने साफ कर दिया है कि तेज रफ्तार और लापरवाही का कॉम्बिनेशन जानलेवा साबित हो सकता है। यात्रियों का कहना है कि बस ड्राइवर आए दिन नियमों की अनदेखी करते हैं और यात्री मजबूरी में चुपचाप सफर करते रहते हैं।
यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लापरवाह चालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि अगली बार यात्री पेड़ या कीचड़ के सहारे न रहे!